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रोड नहीं तो वोट नहीं: कुसमौरा में पांच दिनों तक चला धरना आश्वासन के बाद हुआ समाप्त

लखनऊ के कुसमौरा क्षेत्र में सड़क निर्माण की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन आखिरकार समाप्त हो गया है। स्थानीय लोगों ने सड़क नहीं तो वोट नहीं का नारा बुलंद करते हुए पांच दिनों तक लगातार धरना दिया था। प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से मिले ठोस आश्वासन के बाद निवासियों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है।

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Ankit Yadav
19 अक्ट 2026, 15:12
रोड नहीं तो वोट नहीं: कुसमौरा में पांच दिनों तक चला धरना आश्वासन के बाद हुआ समाप्त

कुसमौरा में सड़क की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन

लखनऊ जिले के कुसमौरा इलाके में इन दिनों बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा था। इसी नाराजगी के चलते क्षेत्र के लोगों ने एकजुट होकर सड़क निर्माण की मांग को लेकर एक बड़ा धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इस आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़क नहीं तो वोट नहीं का नारा बुलंद करते हुए अपनी आवाज पूरी ताकत से उठाई। इस नारे ने पूरे इलाके में गूंज पैदा कर दी और स्थानीय प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया। खराब सड़कों और परिवहन की दुविधा के कारण आम जनता को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत हो रही थी और बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए भी सुगम रास्ता नहीं मिल पा रहा था। इन तमाम बुनियादी समस्याओं से तंग आकर ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी नाराजगी जताने का यह कड़ा रास्ता चुना था। आंदोलन के शुरुआती दिनों से ही बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठ गए थे और अपनी मांगों पर अडिग नजर आ रहे थे। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि जब तक पक्की सड़क के निर्माण का कोई ठोस और आधिकारिक आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन लगातार इसी तरह जारी रहेगा। पांच दिनों तक चले इस लंबे संघर्ष और धरने के बाद आखिरकार प्रशासन के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लेते हुए लोगों को समझाने का प्रयास किया।

पांच दिनों के कड़े संघर्ष के बाद मिला आश्वासन

लखनऊ के कुसमौरा में चल रहे इस अनूठे और मुखर धरने का पांचवें दिन जाकर आखिरकार सुखद समाधान निकला। पिछले पांच दिनों से लगातार अपनी मांगों पर अड़े रहे आंदोलनकारियों और स्थानीय निवासियों के सामने प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों की समस्याओं को विस्तार से सुना और क्षेत्र में जल्द ही सड़क बनवाने का पक्का भरोसा दिया। इस आधिकारिक आश्वासन के मिलने के बाद धरना दे रहे लोगों ने अपना प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा कर दी। आंदोलनकारियों का नेतृत्व कर रहे स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रशासन की बात पर भरोसा करते हुए फिलहाल अपना धरना खत्म किया है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा के भीतर सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ, तो वे फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। इस पांच दिवसीय धरने के दौरान क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल काफी तेज बनी रही। विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने भी धरने स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन किया था। प्रशासन की ओर से मिले लिखित या मौखिक ठोस आश्वासनों के दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद पंचायत और स्थानीय कमेटियों ने धरना समाप्त करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया। धरना समाप्ति के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और उम्मीद जताई कि अब जल्द ही उनके इलाके की तस्वीर बदलेगी और उन्हें आवागमन की बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

बुनियादी सुविधाओं के अभाव और चुनाव का बहिष्कार

भारतीय लोकतंत्र में सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक का मौलिक अधिकार मानी जाती हैं। जब ग्रामीण क्षेत्रों या शहरी इलाकों में इन बुनियादी जरूरतों की लंबे समय तक अनदेखी होती है, तो जनता इस तरह के अनूठे विरोध प्रदर्शनों का सहारा लेती है। सड़क नहीं तो वोट नहीं जैसे नारे इस बात का सीधा प्रतीक होते हैं कि मतदाता अब अपनी शक्ति का इस्तेमाल विकास कार्यों को करवाने के लिए करने लगे हैं। चुनाव के समय नेताओं और जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछने का यह एक बेहद प्रभावी लोकतांत्रिक तरीका माना जाता है। लखनऊ के कुसमौरा में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जनता अब विकास के मुद्दों पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। इस प्रकार के धरने और विरोध प्रदर्शन स्थानीय निकायों और प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बनाते हैं ताकि वे समय रहते विकास योजनाओं को धरातल पर उतार सकें। इस पूरे घटनाक्रम से अन्य क्षेत्रों के लोगों को भी यह प्रेरणा मिलती है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर आवाज उठाएं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन कुसमौरा में सड़क निर्माण के अपने वादे को कितनी जल्दी और किस प्रकार पूरा करता है। जनता की नजरें अब पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि अधिकारी कब से इस बहुप्रतीक्षित सड़क निर्माण कार्य की शुरुआत जमीन पर करते हैं।

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