छत्तीसगढ़ में सब्जियों की कीमतों में भारी वृद्धि
छत्तीसगढ़ राज्य के बाजारों में पिछले कुछ दिनों के दौरान खाने-पीने की जरूरी चीजों के दाम तेजी से ऊपर गए हैं। राज्य भर में प्रति किलोग्राम सब्जी की खरीद पर 15 से 20 रुपए तक की सीधी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हरी धनिया और मूंगा जैसी आम सब्जियों के भाव तो सीधे दोगुने हो चुके हैं जिससे आम गृहणियों का बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। बाजार में सामान महंगा होने की वजह से ग्राहकों ने खरीदारी की मात्रा में काफी कटौती कर दी है। थोक सब्जी मंडी के अध्यक्ष टी श्रीनिवास रेड्डी ने इस स्थिति की पुष्टि करते हुए बताया कि फसलों को भारी नुकसान पहुंचने के कारण मंडियों में माल की आवक बहुत कमजोर पड़ गई है। स्थानीय स्तर पर उत्पादित होने वाली फसलें पूरी तरह से निकल रही थीं लेकिन भारी बारिश के दौर ने उन सबको भी पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। छत्तीसगढ़ की मंडियों में इस समय कुल खपत का मात्र 30 प्रतिशत स्थानीय उत्पाद ही पहुंच पा रहा है। बाकी की 70 प्रतिशत सब्जी की आपूर्ति दूसरे राज्यों से पूरी की जा रही है जो सीधे रायपुर पहुंच रही है।
बाहरी राज्यों से आ रही है अधिकांश सब्जियां
स्थानीय स्तर पर फसल तबाह होने के बाद छत्तीसगढ़ के बाजारों में पड़ोसी और दूरदराज के राज्यों से सब्जियों की गाड़ियां आ रही हैं। वर्तमान समय में कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों से सब्जियों की लगातार आपूर्ति की जा रही है। इन दूरदराज के इलाकों से माल मंगवाने में परिवहन का खर्च जुड़ जाता है जिससे खुदरा दाम और अधिक बढ़ जाते हैं। थोक सब्जी मंडी के अध्यक्ष टी श्रीनिवास रेड्डी ने स्पष्ट किया कि जब तक स्थानीय किसानों की नई फसल तैयार होकर मंडियों तक नहीं पहुंचती, तब तक कीमतों में राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। इसके अलावा वर्तमान समय में पितृपक्ष का पवित्र दौर भी चल रहा है जिसके कारण विशेष प्रकार की सब्जियों की मांग बहुत अधिक बढ़ जाती है। इस अवधि में तरोई और काला बरबटी जैसी चीजों की मांग में भारी उछाल आता है और बाजार में इनके दाम आसमान छू रहे हैं। सामान्य दिनों में तरोई और काला बरबटी जैसी सब्जियां प्रति किलोग्राम 30 से 40 रुपए के भाव पर आसानी से मिल जाया करती थीं। लेकिन मांग बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने के कारण आज यही दोनों सब्जियां बढ़कर 100 से 120 रुपए प्रति किलोग्राम के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं।
बारिश और पितृपक्ष की वजह से बढ़ी मुश्किलें
अचानक हुई मूसलाधार बारिश और बाढ़ की तबाही ने छत्तीसगढ़ के कृषि और बाजार तंत्र को बुरी तरह से प्रभावित करके रख दिया है। किसानों की महीनों की मेहनत पानी में डूब जाने से स्थानीय आवक लगभग शून्य के बराबर हो गई है और व्यापारी पूरी तरह बाहरी राज्यों पर टिके हैं। पितृपक्ष के इन दिनों में पारंपरिक खानपान के लिए तरोई और काला बरबटी की मांग अचानक से कई गुना बढ़ जाती है। मांग और आपूर्ति के इस भारी अंतर ने आम आदमी की जेब पर बहुत बड़ा बोझ डाल दिया है जिससे रसोई का पूरा बजट बिगड़ गया है। थोक सब्जी मंडी के जानकारों का कहना है कि जब तक मौसम पूरी तरह साफ होकर बाहरी राज्यों से आपूर्ति सुचारू नहीं होती, तब तक कीमतों में कमी आना संभव नहीं है। आम ग्राहक महंगे दामों के कारण जरूरत से बहुत कम सब्जियां खरीदने को मजबूर हो रहे हैं जिससे कारोबार पर भी असर पड़ा है। स्थानीय बाजार की यह स्थिति पूरे प्रदेश में चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि हर वर्ग के उपभोक्ता इससे सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।