दीवान बाजार से थवाई पुल मार्ग पर छह महीने से टूटी सड़क
स्थानीय निवासियों और दैनिक यात्रियों को गोरखपुर के वार्ड नंबर 49 के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दीवान बाजार से थवाई पुल को जोड़ने वाली इस सड़क की भौतिक स्थिति पिछले करीब छह महीनों से अत्यंत दयनीय बनी हुई है। इस लंबी अवधि के दौरान मार्ग की मरम्मत का कार्य एक बार भी नहीं किया गया है जिससे समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। सड़क की इस प्रकार की उपेक्षा के कारण इस क्षेत्र से गुजरने वाले हर व्यक्ति को रोजाना संघर्ष करना पड़ता है। आवागमन के लिए इस मुख्य रास्ते का इस्तेमाल करने वाले तमाम लोग अपनी दैनिक यात्रा के दौरान इस बदहाली से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। जिला प्रशासन और संबंधित महकमे की सुस्ती की वजह से जनता का गुस्सा भी अब धीरे-धीरे फूटने लगा है क्योंकि किसी भी स्तर पर राहत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे और जलभराव से बढ़ी परेशानी
मरम्मत के अभाव में इस प्रमुख सड़क पर विभिन्न स्थानों पर बड़े और गहरे गड्ढे बन चुके हैं जो हादसों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। इन टूटे हुए और क्षतिग्रस्त हिस्सों में गंदा नाली का पानी लगातार जमा हो रहा है और कई जगहों पर सड़क के ऊपर से बह रहा है। जलभराव और गड्ढों के अदृश्य रहने के कारण इस रास्ते पर पैदल चलने वाले राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए संतुलन बनाना बहुत कठिन हो गया है। कई बार वाहन चालक इन गंदे पानी से भरे गड्ढों का अंदाजा नहीं लगा पाते हैं और दुर्घटना का शिकार होकर चोटिल हो जाते हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार इस समस्या की लिखित और मौखिक शिकायत संबंधित अधिकारियों से की है। इसके बावजूद नगर निगम के जिम्मेदार पदों पर बैठे नुमाइंदों ने इस तरफ देखना तक मुनासिब नहीं समझा है। जनता का सीधा आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी अधिकारियों की कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
नगर निगम की उदासीनता पर जनता उठा रही गंभीर सवाल
इस विकट परिस्थिति को लेकर आम नागरिकों के मन में नगर निगम की कार्यप्रणाली के प्रति गहरा आक्रोश पनप रहा है। लोग खुले तौर पर यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या नगर निगम प्रशासन किसी बड़े और गंभीर हादसे के होने का इंतजार कर रहा है। बिना किसी ठोस कार्रवाई के महीनों बीत जाने के बाद अब हर किसी की निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस पर कब संज्ञान लेगा। राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा को ताक पर रखकर इस तरह की लापरवाही बरती जाना स्थानीय विकास के दावों की पोल खोलता है। अब यह देखना बेहद जरूरी होगा कि नगर निगम के अधिकारी अपनी नींद कब तोड़ते हैं और इस मार्ग पर कब तक एक्शन लिया जाता है। क्षेत्रवासियों को इस नारकीय जीवन और रोजाना की परेशानी से मुक्ति मिलने की कोई भी निश्चित समय सीमा फिलहाल तय नहीं की गई है।