क्षतिग्रस्त सड़क पर पौधे लगाकर विरोध प्रदर्शन
बस्ती जिले के अंतर्गत आने वाले एक इलाके में स्थानीय निवासियों ने बदहाल सड़क के खिलाफ अनूठे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र के लोगों ने एक टूटी हुई और जर्जर सड़क पर पौधे लगाकर शासन-प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इसी समस्या से तंग आकर नागरिकों ने मुख्य मार्ग के गड्ढों में ही पौधे रोप दिए ताकि संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को जमीनी हकीकत का अहसास कराया जा सके। इस अनोखे प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हुए और उन्होंने अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त की। सड़कों की इस दयनीय स्थिति के कारण आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है और लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्याओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
प्रशासनिक उदासीनता से जनता में बढ़ती नाराजगी
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इलाके की इस प्रमुख सड़क की मरम्मत के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और किसी भी प्रकार का सुधार कार्य शुरू नहीं किया गया है। अधिकारियों की इस कथित उदासीनता के कारण आम जनता में भारी रोष व्याप्त है और उन्होंने विरोध का यह रास्ता चुना। सड़क के गड्ढों में पौधे लगाकर लोगों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि इस मार्ग से रोजाना सैकड़ों दोपहिया और चारपहिया वाहन गुजरते हैं, जिससे धूल उड़ती है और बारिश के मौसम में गड्ढे पानी से भर जाते हैं। जलभराव के कारण वाहन चालकों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता है, जिसके परिणामस्वरूप आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों ने चेताया है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो वे सड़क पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
बुनियादी ढांचे की कमी और स्थानीय महत्व
भारत के विभिन्न ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सड़कों की बदहाली एक आम समस्या बनती जा रही है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ता है। सड़कों का रखरखाव और उनका समय पर डामरीकरण या निर्माण स्थानीय निकायों तथा लोक निर्माण विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है ताकि सुगम यातायात सुनिश्चित किया जा सके। जब इस प्रकार के बुनियादी कार्य समय पर पूरे नहीं होते हैं, तो जनता को विरोध प्रदर्शन जैसे रचनात्मक या कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ता है। बस्तियों और मोहल्लों को जोड़ने वाले इन संपर्क मार्गों की दुर्दशा से आपातकालीन सेवाओं जैसे एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड के समय पर पहुंचने में भी भारी बाधा उत्पन्न होती है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में स्थानीय प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए ताकि जनता का विश्वास व्यवस्था पर बना रहे। इस ताजा घटना ने एक बार फिर से ग्रामीण और शहरी इलाकों की सड़कों की मरम्मत और उनके रखरखाव के बजट तथा कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि इस अनूठे प्रदर्शन के बाद जिम्मेदार विभाग इस टूटी हुई सड़क के निर्माण के लिए कब तक जमीनी कार्रवाई शुरू करता है।