कुंवरपुर चौकी के पास पेड़ का मलबा
अटरिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत लखनऊ-सीतापुर सड़क मार्ग पर एक बड़ा नीम का पेड़ अचानक गिरकर धराशायी हो गया है। यह पेड़ कुंवरपुर पुलिस चौकी के ठीक सामने वाले हिस्से में गिरा है, जिससे सड़क का एक बड़ा हिस्सा अवरुद्ध हो गया है। इस पेड़ के गिरने की घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेड़ के मुख्य तने और शाखाएं सड़क किनारे काफी लंबे समय से इसी तरह बिखरी पड़ी हैं, जिन्हें हटाने का कार्य अब तक लंबित है। इस मार्ग पर भारी वाहनों के साथ-साथ आम नागरिकों का आवागमन निरंतर बना रहता है। पेड़ की मौजूदगी ने सड़क की चौड़ाई को सीमित कर दिया है, जिससे गुजरने वाले चालकों के लिए संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। सड़क पर पड़ा यह मलबा वाहन चालकों के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है और स्थानीय निवासी इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि यदि समय रहते इसे नहीं हटाया गया, तो यहां कोई गंभीर दुर्घटना घट सकती है।
अधिकारियों के आश्वासनों का इंतजार
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई के अधिकारियों से इस मामले में स्थानीय लोगों द्वारा पूर्व में संवाद किया गया था। इस चर्चा के दौरान विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने यह भरोसा दिलाया था कि सड़क किनारे गिरे हुए नीम के पेड़ को शीघ्र ही हटा दिया जाएगा। हालांकि, विभाग द्वारा दिए गए उस आश्वासन को काफी समय बीत चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं देखी गई है। स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि जिम्मेदार महकमे के सुस्त रवैये के कारण यह खतरा बरकरार है। विभाग की तरफ से समय पर पेड़ न हटाए जाने के कारण अब जनता में असंतोष की भावना है। सड़क पर पड़े इस पेड़ को हटाने के लिए किसी भी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने पुनः प्रशासन से अपील की है कि वे अपनी पूर्व की प्रतिबद्धता पूरी करें और तुरंत इस मलबे को सड़क से हटाकर यातायात को सुरक्षित बनाएं।
रात के समय गहराता है खतरा
रात के अंधेरे में सड़क पर पड़ा यह नीम का पेड़ चालकों के लिए सबसे घातक साबित हो रहा है। विशेष रूप से तेज गति से आने वाले वाहनों और दोपहिया सवारों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी बन चुकी है। अंधेरा होने के कारण चालकों को पेड़ की टहनियां और तना समय पर दिखाई नहीं देते, जिससे अचानक ब्रेक लगाने या असंतुलन बिगड़ने की घटनाएं बढ़ने का डर है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि दिन की तुलना में रात के समय यहां से गुजरना दुस्साहस जैसा हो गया है। आवागमन पर इस पेड़ के कारण लगातार नकारात्मक असर पड़ रहा है और सड़क की उपयोगिता भी कम हो गई है। लोग इस बात की चेतावनी दे रहे हैं कि यदि विभाग ने तत्काल कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में होने वाली किसी भी अनहोनी के लिए संबंधित अधिकारी ही जवाबदेह होंगे। वर्तमान स्थिति ने सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। आम जनमानस अब केवल यही मांग कर रहा है कि मार्ग को पूरी तरह से बाधा मुक्त किया जाए ताकि राहगीरों को किसी भी प्रकार की दुर्घटना या शारीरिक चोट का सामना न करना पड़े।