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संवेदनशील पुलिसिंग: जयपुर में शुरू हुआ तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, डीजीपी ने कही बड़ी बात

राजस्थान पुलिस महकमे ने कार्यशैली में सुधार लाने के मकसद से एक नया कदम उठाया है। जयपुर के एक विश्वविद्यालय परिसर में तीन दिवसीय कार्यशाला का श्रीगणेश किया गया है। इस सत्र में कुल पैंतीस पुलिसकर्मी हिस्सा ले रहे हैं।

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Ankit Yadav
16 अक्ट 2026, 12:14
संवेदनशील पुलिसिंग: जयपुर में शुरू हुआ तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, डीजीपी ने कही बड़ी बात

जयपुर विश्वविद्यालय परिसर में प्रशिक्षण का आगाज

जनता के साथ मेलजोल और कार्यप्रणाली को बेहतर रूप देने के लिए राज्य के पुलिस महकमे द्वारा एक विशेष अभियान की शुरुआत की गई है। इसी सिलसिले के तहत जयपुर शहर के आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर एक विशेष कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस तीन दिवसीय आवासीय पाठ्यक्रम का आरंभ गुरुवार के दिन दीप प्रज्वलित करके किया गया। इस सत्र में कुल 35 पुलिसकर्मी शिरकत कर रहे हैं और यह पूरा प्रशिक्षण सत्र आगामी 17 अक्टूबर तक निरंतर जारी रहेगा। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने दीप जलाकर इसका श्रीगणेश किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नागरिकों और कानून के रखवालों के दरमियान आपसी मेलजोल को और अधिक प्रगाढ़ बनाना है ताकि जनता का भरोसा पुलिस पर और ज्यादा बढ़ सके। कार्यस्थल पर आने वाली तमाम परेशानियों और लगातार बदलती चुनौतियों के बीच किस प्रकार से अपनी जिम्मेदारी निभाई जाए, इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस संपूर्ण पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। इस पूरी कवायद के माध्यम से महकमे का प्रयास है कि आम आदमी जब भी अपनी फरियाद लेकर थाने पहुंचे तो उसे एक सकारात्मक और सुरक्षित माहौल का अहसास हो सके।

डीजीपी ने दी पुलिसकर्मियों को नसीहत

सत्र के दौरान राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में समझाया कि अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाना और आम नागरिकों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील रहना ही हमारी कार्यशैली का मुख्य आधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महकमे की एक सकारात्मक और पेशेवर छवि को हमेशा कायम रखना हर एक कर्मी का सामूहिक कर्तव्य बनता है। जब कोई पीड़ित अपनी तमाम उम्मीदें लेकर थाने की दहलीज पर आता है, तो वहां मौजूद अधिकारी को उसकी पूरी बात बेहद धैर्य के साथ सुननी चाहिए। इसके बाद पूरी विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए उस व्यक्ति को समय पर राहत दिलाने का पूरा प्रयास करना चाहिए। संवेदनशीलता का कतई यह अर्थ नहीं है कि कानून के पालन में किसी प्रकार की नरमी बरती जाए, बल्कि इसका सही मतलब कानूनी दायरे में रहकर पीड़ित को न्याय दिलाना है। डीजीपी ने सभी जवानों को निर्देश दिया कि वे खुद को शिकायतकर्ता की जगह पर रखकर महसूस करें कि थाने आने पर वे किस तरह के बर्ताव की उम्मीद करेंगे। ठीक वैसा ही व्यवहार उन्हें हर आने वाले नागरिक के साथ करना चाहिए। इसके अलावा महकमे के पूर्व डीजीपी डॉ। देवराजन ने भी अपने विचार रखे और इसे आत्मचिंतन का एक बहुत बड़ा मंच करार दिया।

कार्यशाला में अपनाई जा रही हैं आधुनिक तकनीकें

इस तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान पुलिसकर्मियों को व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए विभिन्न प्रकार की आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का खुलकर उपयोग किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से केस स्टडी, भूमिका-अभिनय, समूह चर्चा और आत्मचिंतन जैसी गतिविधियां शामिल हैं जिनके जरिए पुलिसिंग को और अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। एचआरडी रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन अपूर्व कुमार ने इस अवसर पर स्वागत भाषण दिया जबकि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ। सोढाणी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस पूरे आयोजन का मुख्य मकसद यह है कि मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मी वास्तविक और कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर संवाद स्थापित करना सीख सकें। शुक्रवार के दिन कार्यशाला के तहत दबाव की परिस्थितियों में पुलिसिंग विषय पर गंभीर चर्चा आयोजित की जाएगी। इसमें कार्यस्थल पर होने वाले मानसिक तनाव को समझने, भावनात्मक पलों में अपने गुस्से पर संयम रखने और नागरिकों के साथ पूरी सहानुभूति रखने के गुण सिखाए जाएंगे। इसके बाद शनिवार के दिन इस पूरी सीख को रोजमर्रा के कामकाज में अमलीजामा पहनाने के उपायों पर विचार होगा और अंत में सभी प्रतिभागियों की व्यक्तिगत तथा इकाई स्तर की कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी।

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