हाईवे पर सवारियों को उतारने का मामला
मुजफ्फरनगर जिले के अंतर्गत दिल्ली-देहरादून हाईवे पर यात्रियों को असुरक्षित तरीके से उतारना खतौली रोडवेज डिपो के कर्मचारियों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। मामला छह दिन पूर्व का है, जब रात के अंधेरे में बस के चालक और परिचालक ने लगभग आठ सवारियों को खतौली कस्बे के भीतर ले जाने के बजाय दिल्ली-देहरादून हाईवे पर ही उतार दिया था। यात्रियों ने जब बस को कस्बे के अंदर ले जाने का आग्रह किया, तो चालक और परिचालक की उनके साथ तीखी नोकझोंक हुई। सवारियों को सड़क पर बीच में ही उतार देने के बाद चालक बस को लेकर वहां से निकल गया। इस पूरी घटना के बाद पीड़ित यात्रियों ने सात अक्टूबर को परिवहन विभाग के कार्यालय पहुंचकर सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) राकेश कुमार को लिखित शिकायत दी। यह घटना सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की सुरक्षा और यात्रियों के प्रति जिम्मेदारियों के उल्लंघन का एक स्पष्ट उदाहरण है, जिसके कारण विभाग को सख्त कदम उठाने पड़े।
विभागीय जांच और दंडात्मक कार्यवाही
यात्रियों द्वारा की गई शिकायत को संज्ञान में लेते हुए एआरएम राकेश कुमार ने जांच प्रक्रिया शुरू की और बस के चालक अनिल तथा परिचालक हरेन्द्र से तत्काल प्रभाव से स्पष्टीकरण मांगा। दोनों कर्मचारियों ने दो दिन पूर्व विभाग को अपना जवाब सौंपा, लेकिन उनके द्वारा दी गई दलीलें और स्पष्टीकरण उच्च अधिकारियों को संतुष्ट करने में पूरी तरह विफल रहे। संतोषजनक उत्तर न मिलने के कारण एआरएम ने इसे सेवा में लापरवाही मानते हुए कड़ा रुख अपनाया। विभागीय कार्यवाही के तहत चालक अनिल और परिचालक हरेन्द्र पर एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। साथ ही, भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न करने की सख्त चेतावनी भी दी गई है। राकेश कुमार ने स्पष्ट किया कि यात्रियों को रात के समय हाईवे जैसे असुरक्षित स्थान पर उतारना नियमों के विरुद्ध है और यह विभाग की कार्यप्रणाली के बिल्कुल विपरीत है। यह जुर्माना सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
नियमों का उल्लंघन और भविष्य की सतर्कता
परिवहन निगम के नियमों के अनुसार बस को निर्धारित रूट और स्टॉपेज के अनुसार ही संचालित किया जाना चाहिए, ताकि यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुँचाया जा सके। खतौली डिपो की इस बस के मामले में जिस प्रकार से यात्रियों को हाईवे पर बीच सफर में छोड़ा गया, वह नियमों की गंभीर अनदेखी है। एआरएम ने अपने बयान में दोहराया है कि यात्रियों की सुरक्षा परिवहन निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दंडात्मक कार्रवाई के बाद डिपो के अन्य कर्मचारियों के बीच भी संदेश गया है कि नियमों का पालन अनिवार्य है। यात्रियों के लिए यह आवश्यक है कि वे ऐसी किसी भी घटना की सूचना संबंधित कार्यालय को दें, ताकि दोषी कर्मचारियों पर समय रहते कार्यवाही की जा सके। विभाग की यह कार्रवाई यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का भरोसा दिलाने के उद्देश्य से की गई है, ताकि भविष्य में दिल्ली-देहरादून हाईवे पर कोई भी यात्री असहाय स्थिति में न छोड़ा जाए।