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श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट में फेरबदल: मदन मोहन पांडेय को मिली बैंकिंग और लेखा व्यवस्था की जिम्मेदारी

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी आंतरिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए नए सदस्यों के बीच कार्यभार का बंटवारा शुरू कर दिया है। इसी प्रक्रिया के तहत मदन मोहन पांडेय को अब वित्तीय और बैंकिंग कार्यों की कमान सौंपी गई है।

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Ankit Yadav
08 अक्ट 2026, 13:07
श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट में फेरबदल: मदन मोहन पांडेय को मिली बैंकिंग और लेखा व्यवस्था की जिम्मेदारी

मदन मोहन पांडेय संभालेंगे ट्रस्ट की वित्तीय कमान

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने कार्यों को सुचारू बनाने के लिए संगठनात्मक स्तर पर एक बड़ा निर्णय लिया है। ट्रस्ट में हाल ही में शामिल हुए सदस्य मदन मोहन पांडेय को बैंकिंग और लेखा-जोखा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। उनके नए दायित्वों में मंदिर ट्रस्ट की बैंकिंग गतिविधियों का संचालन, वित्तीय लेनदेन की देखरेख और लेखा प्रणाली के प्रबंधन का समन्वय करना शामिल होगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य मंदिर से जुड़ी वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, मदन मोहन पांडेय को यह नया काम मिलने के बाद अब पूरे वित्तीय ढांचे का पुनर्गठन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत बैंक खातों के संचालन से लेकर लेखा प्रविष्टि के मानकों को भी नए सिरे से परिभाषित और स्पष्ट किया जा रहा है। ट्रस्ट का पूरा ध्यान इस बात पर है कि हर वित्तीय प्रक्रिया का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी तरह की विसंगति की कोई गुंजाइश न बचे। यह प्रशासनिक फेरबदल ट्रस्ट के कार्यकुशलता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

कार्य विभाजन की प्रक्रिया और नई निगरानी प्रणाली

ट्रस्ट के भीतर विभिन्न सदस्यों को अलग-अलग व्यवस्थाओं का जिम्मा सौंपने की प्रक्रिया फिलहाल तेजी से चल रही है। पहले ट्रस्ट की वित्तीय और लेखा संबंधी अधिकांश महत्वपूर्ण गतिविधियों को पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा संभालते रहे थे। अब ट्रस्ट प्रशासन अपने सदस्यों के बीच जिम्मेदारियों का एक नया खाका तैयार कर रहा है ताकि कार्य का बोझ संतुलित बना रहे। इस नए ढांचे के तहत प्रत्येक विभाग को जवाबदेह बनाया जा रहा है और बैंकिंग कामकाज के लिए अब मदन मोहन पांडेय की निगरानी में समन्वय तंत्र विकसित किया जा रहा है। ट्रस्ट की इस आंतरिक निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने की कोशिशें पिछले कुछ समय से जारी हैं। इन तमाम बदलावों को एक रणनीतिक प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है जिसका मकसद मंदिर प्रबंधन से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड्स को सुरक्षित और सुसंगत रखना है। ट्रस्ट की कोशिश है कि हर जिम्मेदारी का स्पष्ट निर्धारण किया जाए, जिससे कार्यों में कोई भ्रम न रहे। इस प्रक्रिया में सदस्य एक-दूसरे के साथ मिलकर अपनी भूमिकाओं को समझ रहे हैं ताकि मंदिर परिसर की वित्तीय साख पूरी तरह से बरकरार रहे और सभी लेनदेन के रिकॉर्ड पारदर्शी तरीके से दर्ज किए जाएं।

चढ़ावा चोरी मामले के बाद सुरक्षा पर जोर

राम मंदिर के चढ़ावे की राशि से जुड़े हालिया चोरी के प्रकरण ने ट्रस्ट की आंतरिक निगरानी और वित्तीय सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे। इस घटना के बाद से ही ट्रस्ट प्रशासन ने अपनी कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र को कड़ी सुरक्षा के दायरे में लाने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में व्यवस्थाओं को स्पष्ट किया जा रहा है और जिम्मेदारी का नया बंटवारा किया गया है। दूसरी ओर, चढ़ावा चोरी मामले में शामिल आरोपी और पूर्व गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की जमानत याचिका पर बुधवार को अदालत में सुनवाई तय थी। हालांकि, सरकारी अभियोजन पक्ष की ओर से सुनवाई टालने के लिए एक प्रार्थना पत्र पेश किया गया, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने उस दिन सुनवाई नहीं की। मामले की अगली सुनवाई की तारीख अदालत द्वारा अभी तय की जानी शेष है। इन प्रशासनिक बदलावों और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच, ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य मंदिर के वित्तीय प्रबंधन में किसी भी प्रकार की चूक को रोकना है। ट्रस्ट प्रशासन अब ऐसी व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जहां हर स्तर पर कड़ी जवाबदेही तय हो और किसी भी बाहरी या आंतरिक गड़बड़ी को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

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