कालकाजी घटना के बाद प्रशासन का तत्काल कदम दक्षिण दिल्ली के घनी आबादी वाले और शैक्षणिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र माने जाने वाले कालकाजी क्षेत्र में हाल ही में एक गंभीर कानून-व्यवस्था की घटना सामने आई, जिसने आसपास के इलाकों में हड़कंप मचा दिया। इस अप्रिय और डरावनी घटना के सामने आने के तुरंत बाद, क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शुमार लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वुमन का प्रबंधन हरकत में आ गया। छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और छात्र संगठनों के भीतर बढ़ते तनाव को देखते हुए कॉलेज अधिकारियों ने आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि मौजूदा माहौल में छात्राओं का कॉलेज आना सुरक्षित नहीं हो सकता है, इसलिए एहतियात के तौर पर परिसर में होने वाली नियमित शारीरिक कक्षाओं को अगले आदेश तक बंद कर दिया जाए। इसके विकल्प के रूप में सभी शैक्षणिक सत्रों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने का ऐलान किया गया ताकि सेमेस्टर की पढ़ाई का नुकसान न हो और छात्राएं अपने घरों के सुरक्षित दायरे में रहकर ही अपनी शिक्षा जारी रख सकें।
शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और चिंता देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं और छात्राओं के खिलाफ होने वाले अपराध अक्सर गंभीर बहस का विषय बनते रहे हैं, और जब भी किसी कॉलेज के आसपास इस तरह की कोई बड़ी आपराधिक घटना घटती है, तो पूरे शैक्षणिक तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो जाते हैं। कालकाजी क्षेत्र में हुई इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए आने वाली युवतियों की राह कितनी जोखिम भरी हो सकती है। कॉलेज प्रशासन और स्थानीय पुलिस प्रशासन के बीच समन्वय की कमी या सुरक्षा इंतज़ामों में खामियों के कारण अक्सर इस प्रकार के संकट पैदा होते हैं। लेडी श्रीराम कॉलेज के इस कदम के पीछे मुख्य वजह यही चिंता है कि कोई भी संस्थान अपनी छात्राओं के जीवन को जोखिम में डालकर सामान्य दिनों की तरह कामकाज नहीं चला सकता। इस प्रकार के हालात न केवल छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करते हैं, बल्कि उनके अभिभावकों के मन में भी एक स्थायी डर पैदा कर देते हैं, जिससे निपटने के लिए डिजिटल माध्यम का सहारा लेना ही एकमात्र व्यावहारिक उपाय बचता है।
ऑनलाइन कक्षाओं का दौर और भविष्य की कार्ययोजना परिसर के बजाय डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई का संचालन करने के इस निर्णय से हालांकि छात्राओं की सुरक्षा तो सुनिश्चित होती है, लेकिन इसके साथ ही उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और व्यावहारिक अनुभवों पर भी गहरा असर पड़ता है। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता एवं ठोस आश्वासन नहीं मिल जाते, तब तक पढ़ाई ऑनलाइन ही चलती रहेगी। इस अवधि के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से तैयार रहना होगा ताकि पाठ्यक्रम समय पर पूरा किया जा सके। इसके अलावा, छात्र संघ और नागरिक समाज के प्रतिनिधि लगातार यह मांग कर रहे हैं कि कालकाजी इलाके में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत की जाए और सार्वजनिक परिवहन तथा मेट्रो स्टेशनों के आसपास सुरक्षा चौकियों को और अधिक मजबूत किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी छात्रा को इस प्रकार के खौफनाक माहौल का सामना न करना पड़े और शिक्षण संस्थान बिना किसी डर के अपने द्वार खोल सकें।