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स्वरोजगार संकट: सवा लाख आवेदनों में से सिर्फ दो हजार युवाओं को मिला ऋण

राजस्थान में मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत आवेदनों की संख्या बहुत अधिक थी। हालांकि बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण पाने वाले युवाओं की संख्या बेहद कम रही है। इससे सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का बड़ा अंतर सामने आ गया है।

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Ankit Yadav
15 अक्ट 2026, 12:30
स्वरोजगार संकट: सवा लाख आवेदनों में से सिर्फ दो हजार युवाओं को मिला ऋण

बड़ी संख्या में आवेदन लेकिन ऋण सिर्फ दो हजार को

राजस्थान के युवाओं ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के जरिए अपना कारोबार शुरू करने के लिए बड़े पैमाने पर आवेदन किए थे। इस योजना के अंतर्गत प्रदेशभर से सवा लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। हालांकि युवाओं का यह सपना या तो बैंकों और वित्तीय संस्थानों की फाइलों में कैद होकर रह गया या फिर सरकारी औपचारिकताओं के जाल में उलझकर दम तोड़ गया। स्थिति यह है कि सवा लाख से अधिक आवेदनों में से पचास हजार से भी कम आवेदन बैंकों तक पहुंच पाए। इसके बाद बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने बेहद कड़ी प्रक्रिया और खानापूर्ति के चलते केवल दो हजार युवाओं को ही वास्तविक ऋण उपलब्ध कराया है। इस प्रकार योजना के शुरुआती आंकड़े और धरातल पर मिलने वाली मदद के बीच बहुत बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है, जिससे आवेदन करने वाले युवाओं में निराशा का माहौल है और सरकारी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रक्रिया की जटिलता के कारण हजारों युवाओं को अपने रोजगार का सपना अधूरा छोड़ना पड़ रहा है।

छह हजार करोड़ की मांग और कागजी कार्रवाई की बाधाएं

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उद्योग विभाग और बैंकों के स्तर पर कई प्रकार की औपचारिकताएं पूरी की गईं। विभाग के पास पहुंचे सवा लाख आवेदनों की गहन जांच की गई, जिसमें से छियालीस हजार से अधिक युवाओं के आवेदन बिल्कुल खरे पाए गए। इन सभी स्वीकृत आवेदनों को उद्योग विभाग ने मंजूरी देकर आगे की कार्रवाई के लिए बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों के पास भेज दिया था। इनमें से बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने लगभग ढाई हजार आवेदनों को अपनी तरफ से मंजूर भी कर लिया था। इसके बावजूद वास्तविक रूप से ऋण का पैसा केवल करीब दो हजार युवाओं के खातों तक ही पहुंच पाया है। उद्योग विभाग के अधिकारियों का इस संबंध में कहना है कि आवेदनों में रह गई कमियों की पूर्ति समय पर नहीं हो पाती है, जिसके कारण बड़ी संख्या में आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। इसके अलावा जो आवेदन स्वीकार हो चुके हैं, उनमें भी एक बड़ी समस्या सामने आ रही है। अधिकांश युवा मशीनरी या कार्य के लिए सीधे बैंकों से भुगतान कराने के बजाय अपने हाथ में नकद राशि पाना चाहते हैं, जिसे बैंक नियमों के तहत स्वीकार नहीं करते हैं और इसी वजह से ऋण वितरण की यह प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है।

लक्ष्यों में भारी कमी और बत्तीस जिलों की चिंताजनक स्थिति

योजना के शुरुआती दौर में सरकार ने इकतालीस हजार युवाओं को स्वरोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया था। बाद में इस लक्ष्य को बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया और मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट भाषण के दौरान इस योजना के माध्यम से एक लाख युवाओं का साथ देने का स्पष्ट भरोसा दिलाया गया था। इसके विपरीत जमीनी हकीकत यह है कि इस बड़े लक्ष्य की केवल साढ़े छह फीसदी प्राप्ति ही संभव हो सकी है। प्रदेश के बत्तीस जिलों में तो हालात इतने अधिक खराब हैं कि वहां लक्ष्य के दस फीसदी युवाओं को भी इस योजना का संबल नहीं मिल पाया है। सरकार के बड़े-बड़े दावों और बजट घोषणाओं के बावजूद धरातल पर यह योजना अपनी सफलता के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। आवेदकों की भारी भीड़ और छह हजार करोड़ रुपए से अधिक की ऋण मांग के बाद भी केवल दो हजार लोगों तक मदद पहुंचना यह साबित करता है कि सरकारी नीतियों और बैंकिंग तंत्र के बीच बेहतर तालमेल की भारी कमी है। यदि इन प्रशासनिक और कागजी अड़चनों को जल्द दूर नहीं किया गया, तो आने वाले समय में भी युवाओं के लिए स्वरोजगार स्थापित करना एक बहुत बड़ी चुनौती बना रहेगा और सरकारी योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी।

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