शरीफाबाद गांव में तेंदुए की मौजूदगी से दहशत
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के अंतर्गत आने वाले शरीफाबाद गांव में पिछले दो महीनों से एक खतरनाक तेंदुए की उपस्थिति बनी हुई है। इस खूंखार जंगली जानवर के लगातार घूमते रहने से स्थानीय ग्रामीणों की दैनिक जीवनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस संबंध में वन विभाग को पहले भी कई बार सूचना दी थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने उनकी चेतावनियों पर कोई ध्यान नहीं दिया। हालांकि सोमवार को रामजीत कश्यप नामक एक ग्रामीण ने अपने खेत में फसल काटते समय इस तेंदुए को अपनी आँखों से देखा और इसका एक वीडियो भी बनाया। जब यह वीडियो सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर तेजी से वायरल हुआ, तब जाकर वन विभाग की नींद खुली और महकमा हरकत में आया। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि समय रहते यदि विभाग ने कोई ठोस कदम उठाया होता, तो शायद आज यह खौफनाक स्थिति पैदा नहीं होती। ग्रामीणों के अनुसार यह जानवर पिछले साठ दिनों से इलाके में खुलेआम घूम रहा है और कोई भी व्यक्ति अपने खेतों में सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहा है। किसानों और मजदूरों का खेतों की तरफ जाना मुश्किल हो गया है क्योंकि हर समय पर हमले का खतरा बना रहता है। वन विभाग के अधिकारी अब वीडियो सामने आने के बाद सक्रिय हुए हैं और अपनी कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों के कड़े सवालों के घेरे में आ गए हैं।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा और उपस्थिति पर असर
शरीफाबाद कंपोजिट विद्यालय में वर्तमान समय में कुल 201 बच्चे नामांकित हैं और शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक एहतशाम अहमद ने बताया है कि इलाके में तेंदुए के लगातार घूमते रहने के कारण बच्चों की उपस्थिति पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। अभिभावक अपने नौनिहालों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं क्योंकि उन्हें बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा अनहोनी की आशंका सताती रहती है। स्कूल के शिक्षक भी इस बात को लेकर बेहद चिंतित और परेशान हैं कि किसी भी छात्र के साथ कोई अप्रिय घटना न घट जाए। विद्यालय के शिक्षक दुर्गेश कुमार ने इस गंभीर संकट को देखते हुए बच्चों और उनके अभिभावकों को एक विशेष सलाह दी है। उन्होंने बच्चों से कहा है कि वे अकेले स्कूल न आएं बल्कि हमेशा झुंड बनाकर या फिर किसी बड़े व्यक्ति के साथ ही विद्यालय पहुंचे। शिक्षकों का यह प्रयास है कि किसी तरह बच्चों को सुरक्षित स्कूल लाया जा सके और वापस घर पहुंचाया जा सके। इसके बावजूद डर का माहौल इतना ज्यादा है कि कई अभिभावकांनी अपने बच्चों को घरों में ही रोक लिया है जिससे उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। स्कूल प्रशासन और शिक्षक लगातार बच्चों की सुरक्षा के प्रति सतर्कता बरत रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। प्रधानाध्यापक और शिक्षकों ने भी उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस समस्या का जल्द से जल्द कोई स्थायी समाधान निकाला जाए ताकि स्कूल का संचालन बिना किसी भय के सुचारू रूप से चल सके।
वन विभाग की तलाश और इलाके की भौगोलिक स्थिति
तेंदुए की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद से वन विभाग की एक विशेष टीम पिछले तीन दिनों लगातार जंगलों और खेतों की खाक छान रही है। गोमती नदी के किनारे लगभग डेढ़ हजार हेक्टेयर में फैला हुआ विशाल जंगल इस तेंदुए का मुख्य ठिकाना माना जा रहा है। इसी घने जंगल और आसपास के खेतों में वन विभाग के कर्मचारी जानवर को ढूंढने के लिए लगातार कॉम्बिंग कर रहे हैं। हालांकि तीन दिन बीत जाने के बावजूद वन विभाग के हाथ अभी तक पूरी तरह खाली ही रहे हैं और वे इस जंगली जीव को पकड़ने में नाकाम साबित हुए हैं। गोमती नदी के किनारे फैला यह बड़ा क्षेत्रफल वन विभाग के लिए भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है क्योंकि घनी झाड़ियों और पेड़ों की वजह से जानवर आसानी से छिप जाता है। स्थानीय लोग लगातार यह मांग कर रहे हैं कि वन विभाग को अपनी तलाशी अभियान में तेजी लानी चाहिए और पिंजरे तथा अन्य आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए। जब तक यह तेंदुआ पकड़ा नहीं जाता, तब तक शरीफाबाद गांव और आसपास के इलाकों के लोगों को चैन की सांस नहीं मिलने वाली है। वन विभाग के अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि वे जल्द ही इस जानवर को पकड़ लेंगे और इसके लिए लगातार गश्त बढ़ाई जा रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण और स्कूली बच्चे अभी भी भय के साए में जीने को मजबूर हैं और प्रशासन की तरफ से किसी बड़े नतीजे का इंतजार किया जा रहा है।