लक्ष्य से अधिक प्रगति और शीर्ष स्थान
जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत रामपुर में कुल एक लाख पांच हजार पांच सौ दो का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस तय लक्ष्य के मुकाबले जिले में कुल एक लाख सत्ताईस हजार चार सौ पचास फैमिली आईडी तैयार की जा चुकी हैं। यह कुल लक्ष्य का एक सौ बीस दशमलव अस्सी प्रतिशत बैठता है। इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के बलबूते पर जिले ने उनहत्तर दशमलव छियालीस केपीआई अंक हासिल किए हैं। इन अंकों के आधार पर रामपुर ने पूरे प्रदेश में लगातार चौथी बार सर्वोच्च स्थान पर कब्जा जमाया है। जिलाधिकारियों और प्रशासनिक अमले की कड़ी मेहनत से यह बड़ी सफलता हासिल हुई है जिससे स्थानीय नागरिकों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। प्रशासन के स्तर पर इस आंकड़े को जिले की एक बड़ी प्रशासनिक जीत के रूप में देखा जा रहा है जिससे राज्य स्तर पर जिले का नाम रोशन हुआ है।
फैमिली आईडी का उद्देश्य और उपयोग
जिला मजिस्ट्रेट अजय कुमार द्विवेदी ने इस पूरी सफलता के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस डिजिटल पहचान पत्र को बनवाने का मुख्य उद्देश्य ऐसे परिवारों को एक विशिष्ट पहचान देना है जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। इस विशिष्ट व्यवस्था के माध्यम से परिवार के सभी सदस्यों का पूरा विवरण एक ही डिजिटल पहचान के साथ जोड़ दिया जाता है। शासन की विभिन्न लाभार्थीपरक योजनाओं में इस डिजिटल पहचान के आधार पर पात्रता की जांच की जाती है। सत्यापन और योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को इसके जरिए बहुत सरल और तेज बनाया जा रहा है। परिवार के सदस्यों के एकीकृत ब्योरे के आधार पर विभिन्न सेवाओं की सुगमता सुनिश्चित की जाती है। पात्र लाभार्थियों की सही पहचान करने में इससे बहुत मदद मिलती है। पेंशन योजनाएं, छात्रवृत्ति वितरण और अन्य प्रकार की आर्थिक सहायता योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाने में यह एक मजबूत माध्यम साबित हो रहा है।
पारदर्शिता और नागरिकों से विशेष अपील
जिला मजिस्ट्रेट अजय कुमार द्विवेदी ने इसे एक परिवार और एक पहचान की अवधारणा को जमीन पर साकार करने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण व्यवस्था बताया है। इसका स्पष्ट उद्देश्य पात्र परिवारों को सभी सरकारी योजनाओं और जनहित की सेवाओं का लाभ बहुत ही सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मुहैया कराना है। प्रशासन ने जनपद के ऐसे सभी परिवारों से विशेष रूप से अपील की है जिनके पास अपना राशन कार्ड नहीं है। ऐसे प्रत्येक परिवार को अपनी फैमिली आईडी अवश्य बनवानी चाहिए ताकि शासन की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं की सटीक जानकारी मिल सके। पात्रता के नियमों के अनुसार इन सभी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त किया जा सके। इस डिजिटल व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और भ्रष्टाचार पर लगाम लगती है। समयबद्ध तरीके से सरकारी मदद सीधे जरूरतमंदों के बैंक खातों और डिजिटल खातों तक पहुंचाई जा रही है। जिला प्रशासन का यह निरंतर प्रयास है कि कोई भी पात्र परिवार इस महत्वपूर्ण सुविधा से वंचित न रह जाए।