पंडालों और मूर्तियों का निर्माण
काशी शहर के भीतर विभिन्न स्थानों पर इन दिनों उत्सव की तैयारियां काफी तेजी के साथ आगे बढ़ रही हैं। कुल 512 अलग-अलग जगहों पर पंडालों को खड़ा करने का काम चल रहा है। इसके अलावा मूर्तियों का निर्माण और रोशनी की भव्य व्यवस्था करने का कार्य भी युद्ध स्तर पर जारी है। आयोजकों और समितियों की तरफ से पूरी सक्रियता के साथ तैयारियां की जा रही हैं ताकि समय पर सारे इंतजाम पूरे किए जा सकें। दूसरी तरफ शहर की खस्ताहाल सड़कों की स्थिति ने आयोजकों और स्थानीय लोगों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है। लगातार हो रही बारिश के कारण आवागमन के इन मार्गों की हालत और भी ज्यादा जर्जर हो चुकी है। त्यौहार के इन खास दिनों में इन रास्तों से होकर बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं का आना-जाना तय माना जा रहा है। सड़कों पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे और ऊपर उठी हुई गिट्टियां लोगों के चलने-फिरने में भारी रुकावट पैदा कर रही हैं। काफी लंबे अरसे से मुख्य मार्गों का निर्माण या पक्का सुधार नहीं हुआ है। इसी वजह से बरसात के मौसम में इन रास्तों की दशा पूरी तरह से बदतर हो गई है और पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
प्रशासन की ओर से मिला आश्वासन
उत्सव के दौरान केवल पंडालों तक पहुंचना ही नहीं बल्कि कई अन्य तरह के धार्मिक अनुष्ठान और कार्यक्रम भी संपन्न होते हैं। आयोजन के समापन चरण में बड़ी संख्या में विसर्जन जुलूस भी निकाले जाते हैं। इन शोभायात्राओं के दौरान मूर्तियों को अपने कंधों पर उठाकर चलने वाले लोगों को इन टूटी-फूटी सड़कों की वजह से भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए अब यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि उत्सव शुरू होने से पहले ही शहर के सभी प्रमुख रास्तों की तुरंत मरम्मत कराई जाए। जनता की इन परेशानियों को ध्यान में रखते हुए नगर निगम प्रशासन अब पूरी तरह से हरकत में आ गया है। निगम के अधिकारियों की तरफ से शहर की इन खराब सड़कों को बहुत जल्द ही ठीक करवा दिए जाने का पूरा आश्वासन दिया गया है। नगर निगम के अपर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी है। उन्होंने मीडिया और जनता को जानकारी देते हुए बताया है कि मेयर और नगर आयुक्त की तरफ से मिले स्पष्ट निर्देशों के आधार पर काम चल रहा है। इसी क्रम में संबंधित पूजा पंडाल समितियों के साथ लगातार संपर्क साधा जा रहा है और उनकी समस्याओं को सुना जा रहा है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया है कि मेला आधिकारिक तौर पर शुरू होने से पहले सभी जरूरी व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से ठीक करा दिया जाएगा।
कुंडों की बदहाल स्थिति और सफाई
सड़कों की खराब दशा के अलावा शहर के जल स्रोतों और कुंडों की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है और वह भी बहुत चिंताजनक बनी हुई है। शहर के तमाम कुंड अपनी बदहाली के कारण स्वच्छता अभियान की पोल खोल रहे हैं। विशेष तौर पर मंदाकिनी कुंड की वर्तमान स्थिति बहुत ही अधिक दयनीय और खराब बनी हुई है। इस कुंड के अंदर आज भी गणेश पूजनोत्सव और विश्वकर्मा पूजनोत्सव से जुड़े तमाम अवशेष वैसे ही पड़े हुए हैं। इन बचे हुए अवशेषों और पूजा सामग्री की वजह से कुंड का पानी और आसपास का पूरा इलाका गंदा हो रहा है। प्रशासन के स्तर पर इन कुंडों की सफाई को लेकर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। धार्मिक आयोजनों के लिहाज से कुंडों का साफ-सुथरा रहना बेहद जरूरी होता है लेकिन अधिकारियों की अनदेखी से स्थिति बिगड़ती जा रही है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि पर्व नजदीक आने के बावजूद पवित्र कुंडों की सुध नहीं ली जा रही है। नगर निकाय के तमाम आश्वासनों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितनी जल्दी इन कुंडों को पूरी तरह से साफ किया जाता है। यदि समय रहते इन सभी कमियों को दूर नहीं किया गया तो श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।