वाराणसी के घाटों पर मलबे के बीच प्रतिदिन हो रहे शवदाह
वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों पर इन दिनों अत्यंत कठिन परिस्थितियों के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया लगातार चल रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार घाटों पर फैले मलबे और निर्माण सामग्री के ढेर के बीच पुराने स्थान पर ही प्रतिदिन सौ शवदाह हो रहे हैं। इस गंभीर स्थिति के कारण शोक संतप्त परिवारों को अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार के समय भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। घाटों के आसपास मलबे की मौजूदगी के कारण लोगों का आवागमन भी काफी कठिन हो गया है और चलने के लिए सुरक्षित रास्ता तक नहीं बचा है। स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आने वाले शोककर्ताओं का कहना है कि इस स्थिति से पार पाना बहुत मुश्किल हो रहा है। प्रशासन की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए अभी तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है जिससे जनता में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। मलबे के बीच ही धार्मिक अनुष्ठान और अंतिम संस्कार की क्रियाएं पूरी करने की विवशता लोगों को अंदर तक झकझोर रही है।
अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को उठानी पड़ रही है भारी असुविधा
अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिजनों को वाराणसी के इन घाटों पर कदम-कदम पर भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए तो इस मलबे भरे रास्ते से गुजरना और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। पुराने स्थान पर ही प्रतिदिन सौ शवदाह होने की वजह से वहां हमेशा भारी भीड़ और अराजकता की स्थिति बनी रहती है। किसी भी प्रकार की उचित व्यवस्था न होने के कारण लोगों को अपने स्तर पर ही सारी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ रही हैं। गर्मी, धूल और मलबे के कारण स्थिति और अधिक नारकीय बन चुकी है जिससे शोककुल परिवार पूरी तरह बेबस नजर आ रहे हैं। इस स्थान पर न तो बैठने के लिए कोई छायादार जगह बची है और न ही पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध हैं। अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों का कहना है कि वे अपने दिवंगत परिजनों की विदाई शांतिपूर्ण ढंग से भी नहीं कर पा रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं जिससे आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों की वर्तमान स्थिति और पृष्ठभूमि
वाराणसी के इन घाटों का देश भर में अत्यधिक धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व माना जाता है जहां रोज हजारों पर्यटक आते हैं। ऐसे पावन और संवेदनशील स्थलों पर मलबे का इस तरह से जमा रहना और उसी के बीच प्रतिदिन सौ शवदाह होना अत्यंत चिंताजनक विषय है। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की अव्यवस्था से शहर की छवि पर भी बहुत बुरा असर पड़ रहा है जो तीर्थयात्रियों के लिए निराशाजनक है। यदि इस पुराने स्थान पर मलबे को समय रहते नहीं हटाया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक विकट हो सकती है। स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने इस बात पर जोर दिया है कि प्रशासन को तुरंत प्रभाव से सफाई अभियान चलाकर रास्ता साफ करना चाहिए। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के लिए एक सुरक्षित, स्वच्छ और सुव्यवस्थित परिसर का होना बेहद आवश्यक माना जाता है ताकि लोग सम्मानजनक तरीके से अपने प्रियजनों को विदा कर सकें। इस पूरी घटना ने एक बार फिर से स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली और उनकी तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं जिन पर तत्काल ध्यान दिए जाने की सख्त जरूरत है।