Lucknow Desk : उत्तर प्रदेश के किसानों पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का कर्ज लगातार बढ़ रहा है। केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में यूपी के किसानों पर किसान क्रेडिट कार्ड के तहत करीब 1.40 लाख करोड़ रुपये का बकाया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश देश के सभी राज्यों में सबसे आगे है। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए किसानों को खेती-किसानी के लिए कर्ज मिलता है। इसका इस्तेमाल बीज, खाद, सिंचाई और दूसरी कृषि जरूरतों को पूरा करने में किया जाता है। हालांकि, अब किसानों पर इस कर्ज का बोझ बढ़ता दिखाई दे रहा है।
वित्त मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में उत्तर प्रदेश में KCC का कुल बकाया 1,23,076 करोड़ रुपये था। अगले साल यानी 2022-23 में यह बढ़कर 1,28,123 करोड़ रुपये हो गया। 2023-24 में बकाया राशि 1,38,621 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वित्त वर्ष 2024-25 में किसानों पर KCC का बकाया सबसे ज्यादा 1,41,375 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसके बाद 2025-26 में इसमें मामूली कमी आई और यह 1,39,986 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, बकाया अब भी 1.40 लाख करोड़ रुपये के आसपास बना हुआ है। पांच साल के आंकड़ों को देखें तो उत्तर प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड का बकाया करीब 16,900 करोड़ रुपये बढ़ा है।
इस मामले में यूपी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे बड़े कृषि राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में किसानों की खेती के लिए कर्ज पर निर्भरता काफी अधिक है। कर्ज बढ़ने के पीछे खेती की बढ़ती लागत, आय में उतार-चढ़ाव और दूसरी आर्थिक चुनौतियां अहम वजह हो सकती हैं। हालांकि, इन आंकड़ों से यह तय नहीं होता कि सभी किसान कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं। अब सवाल यह है कि किसानों को बढ़ते कर्ज के बोझ से राहत देने के लिए सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड खेती के लिए जरूरी आर्थिक मदद देता है, लेकिन समय पर कर्ज चुकाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती भी बनता जा रहा है।