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कम बारिश का संकट: रतलाम जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने का प्रस्ताव भेजा गया

रतलाम जिले में इस साल मानसून के दौरान सामान्य से पैंतीस प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कम बारिश के कारण उत्पन्न हुए सूखे के हालात से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। मध्य प्रदेश शासन को जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने का औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया गया है।

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Ankit Yadav
01 अक्ट 2026, 16:42
कम बारिश का संकट: रतलाम जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने का प्रस्ताव भेजा गया

कलेक्ट्रेट में हुई उच्च स्तरीय बैठक

बुधवार को रतलाम जिला कलेक्ट्रेट परिसर में जिला विकास एवं सलाहकार समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया था। इस उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए जिले के प्रभारी मंत्री विजय शाह विशेष रूप से रतलाम पहुंचे थे। बैठक के दौरान कलेक्ट्रेट हॉल में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अलावा विभिन्न विभागों के तमाम प्रमुख अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रभारी मंत्री ने सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस वर्ष मानसून के सीजन में हुई मानसूनी बारिश की स्थिति की गहन समीक्षा की। समीक्षा के दौरान यह मुख्य तथ्य सामने आया कि इस साल जिले में तय औसत बारिश का कोटा पूरा नहीं हो पाया है। पूरे इलाके में बादलों की बेरुखी के कारण कृषि कार्य और जल स्रोतों पर बुरा प्रभाव पड़ा है। इसी गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए बैठक में मौजूद सभी लोगों ने जिला प्रशासन और शासन स्तर पर तत्कालिन कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रभारी मंत्री ने चर्चा के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए पूरी स्थिति की जानकारी साझा की और इस बात पर मुहर लगाई कि जिले की मौजूदा हालात सचमुच काफी चिंताजनक बनी हुई है।

प्रभारी मंत्री ने दी संकट की जानकारी

मीडिया के साथ हुई बातचीत में प्रभारी मंत्री विजय शाह ने स्पष्ट शब्दों में बताया कि इस वर्ष रतलाम जिले के अंदर केवल तेईस इंच बारिश ही रिकॉर्ड की गई है। यह कुल आंकड़ा जिले की निर्धारित सामान्य औसत बारिश से पूरे पैंतीस प्रतिशत कम है। इस भारी कमी के कारण पूरे क्षेत्र में सूखे का गंभीर संकट मंडराने लगा है जिस पर बैठक में शामिल सभी जनप्रतिनिधियों ने गहरी चिंता जताई। सभी ने एक स्वर में मांग उठाई कि इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए रतलाम को सूखाग्रस्त घोषित किया जाना चाहिए। जनप्रतिनिधियों की इस मांग पर त्वरित निर्णय लेते हुए बैठक में ही मध्य प्रदेश शासन को आधिकारिक प्रस्ताव भेजने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही प्रभारी मंत्री ने सिंचाई और जल संसाधन से जुड़े जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश भी जारी किए। उन्होंने कहा कि छोटे-मोटे नदी और नालों के बहते पानी को रोकने के लिए तुरंत आवश्यक इंतजाम किए जाएं ताकि भूजल स्तर को बचाया जा सके। इस दौरान प्रभारी मंत्री ने देश भर में कांग्रेस पार्टी द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हंगामा मचाना कांग्रेस पार्टी के नेताओं की पुरानी आदत बन चुकी है और उनके पास करने के लिए इस समय कोई वास्तविक काम नहीं बचा है।

पेयजल और मवेशियों के लिए खास प्रयास

सूखे के इन हालात के बीच जिला प्रशासन का पूरा जोर आम नागरिकों और मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर है। प्रभारी मंत्री ने बैठक के बाद यह भी साफ किया कि जिले के किसी भी हिस्से में पीने के पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। आम जनता और बेजुबान पशुओं के लिए पेयजल की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के वास्ते अभी से विशेष प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। अधिकारी लगातार मैदानी स्तर पर पानी के संकट को दूर करने के लिए अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में जुटे हुए हैं ताकि आने वाले दिनों में किसी बड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े। रतलाम जिले में हुई इस कम बारिश ने कृषि क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामने भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश शासन को भेजे गए सूखाग्रस्त के इस प्रस्ताव पर अब आगे प्रशासनिक मुहर लगना बाकी है जिसके बाद राहत पैकेजों और सहायता कार्यों की रूपरेखा तय की जाएगी। जिला प्रशासन की ओर से उठाए जा रहे इन कदमों का मुख्य उद्देश्य फिलहाल पानी की हर एक बूंद को सहेजना और आमजन को इस सूखे के संकट से सुरक्षित बाहर निकालना है।

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