भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इस वर्ष के मानसून सत्र के समापन चरण को लेकर अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है, जिसके तहत देश के उत्तर-पश्चिमी और उत्तर भारतीय हिस्सों से मानसूनी हवाओं के लौटने का सिलसिला शुरू होने वाला है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में मानसून की विदाई की तारीखों को लेकर पूर्वानुमान सामने आ चुके हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में इन क्षेत्रों से बारिश का दौर पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार मानसून के हटने की प्रक्रिया सामान्य से थोड़ी आगे पीछे हो सकती है, लेकिन वायुमंडलीय परिस्थितियों को देखते हुए सितंबर महीने के आखिरी हफ्तों तक अधिकांश उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी राज्यों से मानसून की विदाई तय मानी जा रही है। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, पड़ोसी राज्य हरियाणा और पंजाब के मौसम को लेकर भी मौसम विभाग ने नए आंकड़े साझा किए हैं, जिनमें इन इलाकों में बारिश की गतिविधियों के थमने और तापमान में क्रमिक बदलाव के संकेत दिए गए हैं।
मानसून का यह दौर अपने आखिरी चरण में है और पिछले कुछ महीनों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश का पैटर्न काफी विविधतापूर्ण रहा है। जहाँ कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक मानसूनी वर्षा दर्ज की गई, वहीं उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई जिलों में सूखे जैसे हालात या फिर छिटपुट बारिश का सामना करना पड़ा। मौसम विशेषज्ञों का विश्लेषण बताता है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्रों के कमजोर पड़ने के कारण अब मानसूनी ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसकने लगी है। यही मुख्य कारण है कि उत्तर भारत के राज्यों से नमी कम होने लगी है और हवा की दिशा में बदलाव दर्ज किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण मानसून के आगमन और विदाई की तय समय-सारणी में लगातार फेरबदल देखने को मिल रहा है, जिसके चलते मौसम पूर्वानुमान एजेंसियों को अपनी निगरानी और तकनीक को और अधिक उन्नत करना पड़ रहा है ताकि समय पर सटीक जानकारी आम जनता तक पहुंचाई जा सके।
मानसून के लौटने के साथ ही इन सभी राज्यों में मौसम का मिज़ाज तेजी से बदलने की पूरी संभावना है, जिसका सीधा असर कृषि गतिविधियों, त्योहारी तैयारियों और आम जनजीवन पर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश और राजस्थान के किसानों के लिए यह समय खरीफ की फसलों की कटाई और रबी की बुआई की तैयारी का होता है, इसलिए मानसून की विदाई की सही जानकारी होना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है ताकि वे अपनी फसलों के प्रबंधन की उचित योजना बना सकें। इसके अलावा, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में बारिश थमने के बाद उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि इसके तुरंत बाद अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही सुबह और शाम के समय हल्की ठंडक का अहसास शुरू हो जाएगा। पर्यावरणविदों और मौसम वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि मानसून के जाने के बाद आने वाले महीनों में वायु प्रदूषण की समस्या एक बार फिर इन मैदानी राज्यों में सिर उठा सकती है, जिसके लिए स्थानीय प्रशासन और सरकारों को अभी से एहतियाती कदम उठाने की आवश्यकता होगी ताकि स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।