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मौसम अलर्ट: राजस्थान के 36 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, बंगाल की खाड़ी के सिस्टम का असर
राजस्थान में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल गया है। बंगाल की खाड़ी में बने लो-प्रेशर सिस्टम के प्रभाव के चलते राज्य के 36 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
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Ankit Yadav
14 सित 2026, 12:01
राजस्थान के विभिन्न संभागों में मानसून का दौर एक बार फिर से सक्रिय हो गया है, जिससे आम जनजीवन और कृषि गतिविधियों पर गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारियों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने एक सक्रिय निम्न दबाव के क्षेत्र यानी लो-प्रेशर सिस्टम के उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ने के कारण यह परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं। इस मौसमी बदलाव के चलते राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ घंटों और दिनों के दौरान झमाझम बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है, जिसे लेकर प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
मौसम विभाग की चेतावनी और जिलों की स्थिति
मौसम विभाग द्वारा जारी की गई ताजा चेतावनियों के अनुसार, राज्य के कुल 36 जिलों को इस मानसूनी गतिविधि के दायरे में रखा गया है। इनमें से कई क्षेत्रों में मेघगर्जन और वज्रपात के साथ मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी चौराहों तक पानी भरने की समस्याओं से निपटने के लिए स्थानीय निकायों को सतर्क कर दिया गया है। विशेष रूप से संवेदनशील और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके और जनहानि को टाला जा सके।
कृषि जानकारों का मानना है कि यह बारिश प्रदेश के किसानों के लिए एक तरफ जहां राहत लेकर आई है, वहीं अत्यधिक जलभराव से खड़ी फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है। जिन इलाकों में लंबे समय से सूखे जैसे हालात बने हुए थे या फिर पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं बरसा था, वहां के अन्नदाताओं के चेहरे इस वेदर अपडेट के बाद खिल उठे हैं। हालांकि, तेज हवाओं के साथ होने वाली बारिश से पकी हुई फसलों के गिरने का डर भी बना रहता है, जिसके चलते किसान वर्ग अपनी उपज को सुरक्षित करने के उपायों में जुट गया है।
प्रशासनिक तैयारियां और एहतियाती कदम
संभावित आपदा और भारी बारिश के खतरों को देखते हुए राज्य के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सभी जिला कलेक्टरों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। राहत एवं बचाव दलों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। बिजली आपूर्ति और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए संबंधित विभागों के कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं या उन्हें फील्ड में तैनात कर दिया गया है।
नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे मौसम विभाग के अगले अपडेट तक अनावश्यक रूप से यात्रा करने से बचें और जलभराव वाले मार्गों से दूर रहें। स्कूल और शैक्षणिक संस्थानों के संचालन को लेकर भी स्थानीय प्रशासन अपने स्तर पर निर्णय ले रहा है ताकि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। आने वाले कुछ दिनों तक राज्य के लोगों को इस मानसूनी मिजाज का सामना करना पड़ेगा, और तापमान में भी खासी गिरावट दर्ज की जा रही है जिससे उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली है।