राजधानी लखनऊ में टूटा 19 साल का रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह से सक्रिय बनी हुई हैं और इसका सबसे ज्यादा असर राजधानी लखनऊ पर देखने को मिला है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक लखनऊ में मूसलाधार बारिश ने पिछले 19 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। शहर के निचले इलाकों में पानी भर जाने की वजह से आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार आज भी राज्य के कई प्रमुख जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। लगातार हो रही इस प्राकृतिक तबाही के कारण स्थानीय नागरिकों की दैनिकचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है और प्रशासनिक अमला स्थिति पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
मौसम विभाग की चेतावनी और राहत के सवाल मौसम विज्ञानियों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनने की वजह से बादलों का डेरा लगातार बना हुआ है। इस तरह की मौसमी परिघटनाएं जब भी सक्रिय होती हैं, तो बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाली नमीयुक्त हवाएं मैदानी इलाकों में जमकर बरसती हैं। राजधानी लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में पिछले कई दिनों से जारी इस मानसूनी कहर के पीछे बड़े पैमाने पर वायुमंडलीय बदलाव जिम्मेदार माने जा रहे हैं। आम जनमानस के मन में अब यही सवाल सबसे बड़ा बना हुआ है कि इस भयंकर बारिश और जलभराव की स्थिति से कब तक पूरी तरह से राहत मिल पाएगी। मौसम विशेषज्ञों का यह आकलन है कि आगामी कुछ दिनों तक बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है और तापमान में आई भारी गिरावट के चलते लोगों को उमस से तो निजात मिली है, लेकिन लगातार बरस रहे पानी ने नई मुसीबतें खड़ी कर दी हैं।
प्रशासनिक तैयारियां और आगे का प्रभाव भारी बारिश के इस रेड अलर्ट को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्कता बरत रहे हैं। स्कूलों में छुट्टियों की घोषणा करने के साथ-साथ जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी की निकासी के लिए युद्ध स्तर पर पंपिंग सेट लगाए जा रहे हैं। आपदा प्रबंधन इकाइयों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नागरिकों को तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। आने वाले दिनों में यदि बारिश का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है, तो फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है जिससे कृषि क्षेत्र पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए यातायात पुलिस लगातार वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दे रही है और लोगों से यह अपील की जा रही है कि वे बहुत जरूरी होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें।