पिलानी में पारा 41 डिग्री पार
मानसून के राज्य से विदा होने के तुरंत बाद ही पूरे प्रदेश में गर्मी का प्रकोप काफी तेज हो गया है। झुंझुनूं जिले के पिलानी में शनिवार को दिन का अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर दर्ज किया गया है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान राज्य के तमाम इलाकों में मौसम पूरी तरह साफ रहा है और सुबह से ही आसमान में तेज धूप खिली रही है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आने वाले एक सप्ताह तक राज्यभर में आसमान बिल्कुल साफ रहने की पूरी संभावना है। इसी तरह लगातार तेज धूप और गर्मी का दौर बना रहने की उम्मीद है जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। जयपुर शहर में भी शनिवार के पूरे दिन भीषण गर्मी का अहसास लोगों को होता रहा। दिन के समय खिली तेज धूप ने लोगों को झुलसाने का काम किया जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो गया। जयपुर का अधिकतम तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री बढ़कर 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। गर्मी के कारण राजधानी की रातों में भी ठंडक कम हो गई है।
जयपुर में बढ़ी रात की गर्मी
राजधानी जयपुर में मौसम में लगातार गर्मी बढ़ने के कारण रात के समय तापमान में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वजह से रात के वक्त मिलने वाली हल्की ठंडक इस बार काफी कम महसूस हो रही है। जयपुर में शनिवार को न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है जो सामान्य से अधिक है। जयपुर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने आज से ही राज्य में मौसम साफ रहने और कड़ी धूप निकलने की प्रबल आशंका जताई है। हालांकि इन तमाम बदलावों के बावजूद तापमान में किसी बहुत बड़े खास परिवर्तन के देखने को मिलने की संभावना नहीं है। दिन के समय राज्य के अधिकांश प्रमुख शहरों का तापमान 30 डिग्री से लेकर 42 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ रात का न्यूनतम तापमान भी 18 से 25 डिग्री सेल्सियस के दायरे में रहने की पूरी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के वैज्ञानिक लगातार इन तमाम गतिविधियों पर अपनी पूरी नजर बनाए हुए हैं ताकि आम लोगों को समय पर जानकारी मिल सके और वे इसके मुताबिक अपनी तैयारियों को पूरा कर सकें।
11 जिलों पर गंभीर सूखे का संकट
कमजोर मानसून के चलते पूरे राजस्थान राज्य के सामने पिछले दस सालों के सबसे बड़े और भीषण अकाल का खतरा आन खड़ा हुआ है। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस समय राज्य के ग्यारह से भी अधिक जिले सूखे की भारी चपेट में आ चुके हैं। इन सभी क्षेत्रों में सामान्य से पचास प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई है जिसके कारण पानी का भारी संकट पैदा हो गया है। हालात इतने ज्यादा गंभीर और चिंताजनक बन चुके हैं कि प्रभावित इलाकों में लोगों की प्यास बुझाने के लिए अब पानी की स्पेशल ट्रेनें चलानी पड़ेंगी। प्रशासन और संबंधित विभाग इस विकट स्थिति से निपटने के लिए जरूरी उपायों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। मानसून के तीन दिन की देरी से विदा होने और इस बार पूरे सीजन में सामान्य से बाईस प्रतिशत कम बारिश होने के कारण यह बदतर स्थिति उत्पन्न हुई है। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि किसानों की फसलें पानी की कमी के कारण बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई हैं और आने वाले दिन काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।