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प्रदूषण का संकट: दिल्ली, यूपी, राजस्थान और हरियाणा के स्कूलों के लिए CAQM की नई सलाह

देश की राजधानी दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के स्कूलों में जहरीली हवा के गंभीर प्रभाव को देखते हुए पर्यावरण नियंत्रण प्राधिकरण ने आगामी महीनों की गतिविधियों को लेकर महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं।

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Ankit Yadav
16 सित 2026, 14:56
प्रदूषण का संकट: दिल्ली, यूपी, राजस्थान और हरियाणा के स्कूलों के लिए CAQM की नई सलाह
सर्दियों के मौसम की शुरुआत से ठीक पहले उत्तर भारत में वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ने लगा है। इसी गंभीर परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन यानी CAQM ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के शैक्षणिक संस्थानों के लिए विशेष परामर्श जारी किया है। इस सलाह का मुख्य उद्देश्य आने वाले महीनों में बच्चों के स्वास्थ्य को खतरनाक प्रदूषक तत्वों और जहरीली हवा के कुप्रभावों से सुरक्षित रखना है। खासकर उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में स्मॉग की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन पहले से ही अपनी तैयारियों को पुख्ता कर रहा है ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना न करना पड़े।

नवंबर और दिसंबर के लिए गाइडलाइंस

नवंबर और दिसंबर के दौरान ठंड बढ़ने के साथ ही हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की जाती है, जिसका सीधा असर स्कूली बच्चों की शारीरिक गतिविधियों और आउटडोर स्पोर्ट्स पर पड़ता है। CAQM द्वारा दी गई नई सलाह के अनुसार, स्कूलों को इस अवधि में होने वाले खेलकूद और अन्य बाहरी कार्यक्रमों की रूपरेखा में बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चों को लंबे समय तक जहरीले वातावरण में न रहना पड़े। स्थानीय प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि इन नियमों का कड़ाई से पालन हो। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ लखनऊ के शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी स्थिति पर करीब से नजर बनाए रखने के निर्देश मिले हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत एहतियाती कदम उठाए जा सकें। अभिभावकों और शिक्षकों लंबे समय से इस बात की मांग कर रहे थे कि सर्दियों के महीनों में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण अक्सर छोटे बच्चों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक जब बेहद खराब श्रेणी में पहुंच जाता है, तब बच्चों के लिए खुली हवा में दौड़ना या खेलना बेहद हानिकारक हो सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आयोग ने स्कूलों को इंडोर एक्टिविटीज पर ज्यादा जोर देने की सलाह दी है। आगामी दिनों में राज्य सरकारों और जिला प्रशासन द्वारा इन दिशा-निर्देशों के आधार पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार किए जाने की संभावना है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों के कई शहर हर साल सर्दियों में गंभीर प्रदूषण की चपेट में आ जाते हैं, जिसके चलते समय-समय पर स्कूलों के समय में फेरबदल या छुट्टियां करनी पड़ती हैं। CAQM के इस सक्रिय कदम से उम्मीद की जा रही है कि स्कूल प्रबंधन पहले से ही सतर्क रहेंगे और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचा जा सकेगा। प्रशासन की यह कोशिश रहेगी कि पढ़ाई का नुकसान भी न हो और बच्चों की सेहत भी सुरक्षित रहे।
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