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भाषा की प्रगति: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हिंदी अन्य भारतीय भाषाओं को साथ लेकर आगे बढ़ रही है और तकनीक तथा अनुसंधान का प्रमुख माध्यम बन रही है

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में हिंदी भाषा के विकास और उसके बढ़ते दायरे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदी देश की अन्य सभी स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को साथ लेकर प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रही है।

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Ankit Yadav
15 सित 2026, 15:32
भाषा की प्रगति: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हिंदी अन्य भारतीय भाषाओं को साथ लेकर आगे बढ़ रही है और तकनीक तथा अनुसंधान का प्रमुख माध्यम बन रही है
देश में भाषाओं के विकास और उनके आधुनिकीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने हालिया संबोधन में इस बात पर जोर दिया है कि हमारी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा के रूप में पहचानी जाने वाली हिंदी आज केवल बोलचाल की भाषा तक सीमित नहीं रह गई है। यह आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुसार खुद को ढाल रही है और देश की अन्य सभी क्षेत्रीय एवं स्थानीय भाषाओं को अपने साथ लेकर आगे बढ़ रही है। इससे देश के भाषाई ढांचे में एक नई एकता और समरसता देखने को मिल रही है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को और अधिक मजबूत करती है।

तकनीक और अनुसंधान में बढ़ती भूमिका

डिजिटल युग और आधुनिकता के इस दौर में भाषा का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि किस प्रकार हिंदी ने विज्ञान, सूचना तकनीक और अकादमिक अनुसंधान के क्षेत्रों में उल्लेखनीय जगह बनाई है। पहले जहाँ तकनीकी शिक्षा और उच्च अनुसंधान केवल अंग्रेजी तक सीमित माने जाते थे, वहीं अब हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में भी उच्च स्तरीय शोध सामग्री उपलब्ध होने लगी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी के बढ़ते प्रयोग ने इसे आधुनिक विज्ञान और तकनीकी विकास का एक सशक्त वाहन बना दिया है, जिससे आम जनता और शोधकर्ताओं दोनों को भारी लाभ मिल रहा है। भारतीय भाषाओं के बीच आपसी संवाद और समन्वय को बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। हिंदी और अन्य प्रादेशिक भाषाओं के बीच किसी भी प्रकार के गतिरोध को दूर करते हुए सभी को एक साझा मंच प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। जब देश की सभी भाषाएं मिलकर काम करती हैं, तो राष्ट्र की बौद्धिक क्षमता में बहुमूल्य वृद्धि होती है। इस पहल से न केवल भाषाई गौरव बढ़ता है बल्कि देश के सुदूर इलाकों के युवाओं को भी अपनी ही भाषा में अत्याधुनिक तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने का सुनहरा अवसर मिल रहा है, जो समावेशी विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए यह बदलाव बेहद दूरगामी परिणाम देने वाला साबित हो सकता है। शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं का मानना है कि यदि तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं का इसी प्रकार विस्तार होता रहा, तो देश का युवा वर्ग अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करके वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर सकेगा। सरकार और विभिन्न संस्थानों द्वारा किए जा रहे इन निरंतर प्रयासों से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी आत्मनिर्भरता की रीढ़ साबित होंगी।
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