कंटाप
NEWS
सोमवार, 31 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल बाढ़ में अब तक 919 की मौत: 4200 से ज्यादा लोग लापता; अज्ञात शवों को दफनाना शुरू, सैकड़ों कब्रें तैयार      दिल्ली फिर शर्मसार! स्लीपर बस में 16 साल की लड़की से गैंगरेप, 47km तक दरिंदगी      PM मोदी को उज्बेकिस्तान से मिला सम्मान तो बोले असदुद्दीन ओवैसी- 'बाबर के देश से अवार्ड, BJP वालों को मुबारकबाद'      ट्रंप के टैरिफ की मोदी ने निकाली काट, बदली विदेश नीति; अमेरिकी अखबार भी करने लगा तारीफ      THAAD, F-35, पैट्रियट का ठिकाना है मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस, ट्रंप की सबसे कमजोर नस, दबाते ही चीख उठता है अमे...      आज का मौसम 31 अगस्त: 12 घंटों के अंदर 18 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, 80 की रफ्तार से हवा; IMD अपडेट      राहुल गांधी पर हल्द्वानी में FIR, 'शुद्धिकरण' पर सियासी घमासान, SC-ST एक्ट में दर्ज हुआ केस      आरएसएस चीफ़ मोहन भागवत बोले, मुसलमानों को देश से बाहर निकालने की सोच वाले हिन्दू नहीं     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
राजनीति

तीखे सवाल: विदेश में बोलने और देश में चुप रहने पर सिब्बल ने भागवत से मांगे जवाब

वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयानों को लेकर तीखा कटाक्ष किया है और विदेश में दिए जाने वाले भाषणों तथा घरेलू मामलों पर चुप्पी साधने को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

A
Ankit Yadav
31 अग 2026, 11:58
तीखे सवाल: विदेश में बोलने और देश में चुप रहने पर सिब्बल ने भागवत से मांगे जवाब
देश के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब वरिष्ठ वकील और राजनेता कपिल सिब्बल ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की कार्यशैली और बयानों पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए। सिब्बल ने मुख्य रूप से इस बात पर आपत्ति जताई कि किस प्रकार देश के बड़े वैचारिक संगठनों के नेता अक्सर विदेशों के मंचों से भारत की संस्कृति, लोकतंत्र और सामाजिक ताने-बाने पर खुलकर विचार रखते हैं, परंतु जब देश के भीतर गंभीर मुद्दे उठते हैं, तो उनकी चुप्पी पर कई प्रकार के संशय खड़े हो जाते हैं। इस तरह के बयानों से देश की घरेलू राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है और विभिन्न दलों के नेताओं की ओर से इस पर प्रतिक्रियाएं आने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।

विचारधाराओं की टकराहट और बयानों के मायने

भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में वैचारिक मतभेद कोई नई बात नहीं है, परंतु जब प्रमुख हस्तियां इस तरह आमने-सामने आती हैं, तो जनता का ध्यान आकर्षित होना स्वाभाविक है। कपिल सिब्बल ने जिस अंदाज में यह मुद्दा उठाया है, उससे साफ जाहिर होता है कि विपक्षी खेमा इन दिनों सत्ता पक्ष और उससे जुड़े संगठनों के वैचारिक प्रवक्ताओं को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। उनका तर्क है कि यदि राष्ट्र निर्माण और वैचारिक शुचिता की बात ग्लोबल प्लेटफार्म पर की जा सकती है, तो देश के भीतर उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर भी उतनी ही मुखरता से अपनी बात रखनी चाहिए। आलोचकों का मानना है कि इस प्रकार के तीखे सवालों से वैचारिक संगठनों की दोहरी नीति उजागर होती है, जबकि समर्थकों का यह भी कहना है कि बयानों को अक्सर राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है।

सार्वजनिक चर्चाओं पर संभावित प्रभाव

आने वाले दिनों में इस बयानबाजी के और अधिक तूल पकड़ने की पूरी संभावना है क्योंकि देश में विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच लगातार गहमागहमी बनी हुई है। जनता के बीच भी इस बात की चर्चा है कि क्या बड़े नेताओं की विदेश यात्राओं के दौरान दिए जाने वाले भाषण वास्तव में जमीनी हकीकत से मेल खाते हैं या फिर ये केवल कूटनीतिक और वैचारिक प्रचार का हिस्सा बनकर रह जाते हैं। चूंकि कपिल सिब्बल अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उनके द्वारा उठाए गए इन बिंदुओं पर संघ की ओर से या भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में वैचारिक संघर्ष को एक बार फिर से केंद्र में ले आया है, जिससे आगामी चुनावों और राजनीतिक रणनीतियों पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज