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पारिस्थितिकी संरक्षण में तमिलनाडु की बड़ी सफलता: मन्नार की खाड़ी में भारत का पहला 'समुद्री घास संरक्षण अभ्यारण्य' घोषित

समुद्री जैव-विविधता और दुर्लभ समुद्री जीव डुगोंग (Dugong) के संरक्षण के लिए तमिलनाडु सरकार ने मन्नार की खाड़ी और पाक खाड़ी क्षेत्र में विशेष संरक्षण क्षेत्र अधिसूचित किया है।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 18:35
पारिस्थितिकी संरक्षण में तमिलनाडु की बड़ी सफलता: मन्नार की खाड़ी में भारत का पहला 'समुद्री घास संरक्षण अभ्यारण्य' घोषित
पर्यावरण और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की दिशा में उत्तरदायी कदम उठाते हुए तमिलनाडु पर्यावरण और वन विभाग ने मन्नार की खाड़ी और पाक खाड़ी क्षेत्र के 500 वर्ग किलोमीटर से अधिक तटीय क्षेत्र को भारत का पहला 'समुद्री घास संरक्षण अभ्यारण्य' (Seagrass Conservation Sanctuary) अधिसूचित किया है। समुद्री घास (Seagrass) तटीय जल में उगने वाले ऐसे पौधे हैं जो कार्बन डाइऑक्साइड को तेजी से अवशोषित करते हैं और समुद्री कटाव को रोकते हैं। यह क्षेत्र विशेष रूप से लुप्तप्राय समुद्री स्तनधारी 'डुगोंग' (जिसे समुद्री गाय भी कहा जाता है) और कई प्रकार की दुर्लभ मछलियों तथा कछुओं का प्राकृतिक आवास है।

मत्स्य पालन और तटीय समुदायों की सुरक्षा

पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस अभ्यारण्य की स्थापना से पारंपरिक मछुआरों की आजीविका और नौकायन गतिविधियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके विपरीत, समुद्री घास के संरक्षण से तटीय जल में मछलियों के प्रजनन स्थलों में सुधार होगा, जिससे लंबी अवधि में मछुआरों की पकड़ी जाने वाली मछलियों की मात्रा बढ़ेगी। सरकार अवैध ट्रॉलर बोट्स और तली में जाल फेंककर की जाने वाली अवैध बोटिंग (bottom trawling) पर कड़ाई से रोक लगाएगी, जिससे समुद्री घास का मैदान नष्ट होने से बच सके।

जलवायु परिवर्तन से मुकाबले में वैश्विक सराहना

इस ऐतिहासिक पहल की अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठनों और जलवायु वैज्ञानिकों ने काफी सराहना की है। नीले कार्बन (Blue Carbon) के भंडारण में समुद्री घास के मैदान जंगलों की तुलना में कई गुना अधिक प्रभावी माने जाते हैं। तमिलनाडु सरकार इस क्षेत्र में ईको-टूरिज्म और स्थानीय मछुआरा समुदायों को जोड़कर 'समुद्री मित्र' योजना भी शुरू करने जा रही है। यह कदम वैश्विक मंच पर जलवायु परिवर्तन से निपटने और तटीय जैव-विविधता को बचाने के भारत के राष्ट्रीय संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
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