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हस्तशिल्प उद्योग को वैश्विक पहचान: मध्य प्रदेश के चंदेरी बुनकरों को मिला पहला भौगोलिक संकेत आधारित डिजिटल एस्क्रो भुगतान

मध्य प्रदेश के पारंपरिक चंदेरी बुनकर समुदाय ने डिजिटल वित्तीय तकनीक के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक नया प्रतिमान स्थापित किया है।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 17:36
हस्तशिल्प उद्योग को वैश्विक पहचान: मध्य प्रदेश के चंदेरी बुनकरों को मिला पहला भौगोलिक संकेत आधारित डिजिटल एस्क्रो भुगतान
भारतीय हथकरघा उद्योग के इतिहास में एक क्रांतिकारी बदलाव दर्ज करते हुए, मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी बुनकर सहकारी संघ ने वैश्विक खरीदारों के साथ सीधे डिजिटल एस्क्रो भुगतान प्रणाली का सफलतापूर्वक उपयोग शुरू कर दिया है। इस नई प्रणाली के लागू होने से बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है और बुनकरों को उनके उत्पादों का उचित पारिश्रमिक सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त हो रहा है। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय और फिनटेक कंपनियों के संयुक्त प्रयासों से इस सुरक्षित भुगतान गेटवे को डिजाइन किया गया है, जो भौगोलिक संकेत से जुड़े उत्पादों की प्रामाणिकता की स्वतः पुष्टि करता है।

डिजिटल सुरक्षा और पारदर्शिता

इस अत्याधुनिक एस्क्रो प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खरीदार द्वारा भुगतान की गई राशि तब तक सुरक्षित रहती है जब तक कि उत्पाद की गुणवत्ता की अंतरराष्ट्रीय मानकों पर जांच नहीं हो जाती। जैसे ही माल बंदरगाह से रवाना होता है, स्मार्ट अनुबंध तकनीक के जरिए धनराशि का एक हिस्सा तुरंत बुनकर के खाते में स्थानांतरित हो जाता है। इससे कारीगरों को कच्चे माल की खरीद के लिए किसी भी साहूकार या उच्च ब्याज वाले ऋण पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। चंदेरी के पारंपरिक कारीगरों ने इस तकनीक को अपनाने के लिए पिछले कुछ हफ्तों में विशेष डिजिटल साक्षरता कार्यशालाओं में भाग लिया था, जिसके परिणाम अब बेहद उत्साहजनक आ रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सीधी पहुंच

इस वित्तीय नवाचार के कारण यूरोपीय संघ और उत्तरी अमेरिका के बड़े फैशन हाउस अब सीधे चंदेरी के बुनकरों से थोक ऑर्डर बुक कर रहे हैं। बिचौलियों के हटने से इन कपड़ों की लागत में पारदर्शिता आई है और कारीगरों का मुनाफा सीधे तौर पर तीन गुना तक बढ़ गया है। राज्य सरकार अब इस मॉडल को देश के अन्य प्रमुख हस्तशिल्प केंद्रों जैसे महेश्वर और बाघ प्रिंट तक विस्तारित करने की योजना बना रही है। इस कदम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति मिलेगी और पारंपरिक कला को नई पीढ़ी के बीच एक आकर्षक आजीविका विकल्प के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।
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