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राजनीति

राजनीतिक भाषा पर मंथन: राजनाथ सिंह और एम. वेंकैया नायडू ने सार्वजनिक जीवन में गरिमापूर्ण संवाद की जरूरत पर दिया जोर

देश के दो वरिष्ठ राजनीतिक दिग्गजों ने वर्तमान राजनीतिक बहसों में गिरते स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी दलों से सार्वजनिक जीवन में शालीनता और वैचारिक गरिमा बनाए रखने की अपील की है।

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Kantap News डेस्क
19 अग 2026, 13:49
राजनीतिक भाषा पर मंथन: राजनाथ सिंह और एम. वेंकैया नायडू ने सार्वजनिक जीवन में गरिमापूर्ण संवाद की जरूरत पर दिया जोर
भारतीय राजनीतिक मंच पर व्यक्तिगत हमलों और अमर्यादित बयानों के बढ़ते चलन पर रोक लगाने के लिए अब देश के वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने एक संयुक्त कार्यक्रम के दौरान देश के राजनीतिक नेतृत्व को नसीहत देते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वस्थ और गरिमापूर्ण संवाद का होना सबसे अनिवार्य शर्त है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच चुनावी रंजिश के चलते भाषा की मर्यादा लगातार तार-तार हो रही है और वैचारिक मतभेद व्यक्तिगत दुश्मनी में बदलते जा रहे हैं। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि असहमति लोकतंत्र का गहना है, लेकिन उसे व्यक्त करने का तरीका शालीन होना चाहिए।

संवाद की गिरती गुणवत्ता पर चिंता

अपने संबोधन में इन वरिष्ठ राजनेताओं ने पुरानी पीढ़ी के नेताओं के उन उदाहरणों को याद किया जिन्होंने वैचारिक रूप से धुर विरोधी होने के बावजूद एक-दूसरे का हमेशा सम्मान किया। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि आज के सोशल मीडिया के दौर में तीखे और सनसनीखेज बयान देने की होड़ मच गई है, जिससे न केवल राजनीतिक संस्कृति का पतन हो रहा है बल्कि नई पीढ़ी के सामने भी एक गलत मिसाल पेश हो रही है। नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि राजनीति का उद्देश्य जनता की सेवा करना और देश का विकास करना है, न कि एक-दूसरे की व्यक्तिगत आलोचना करके माहौल को जहरीला बनाना। सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं को अपनी भाषा पर संयम रखने की आवश्यकता है।

लोकतंत्र को मजबूत करने की अपील

इस उच्च स्तरीय अपील का राजनीतिक गलियारों में व्यापक असर देखने को मिल रहा है और कई बुद्धिजीवियों ने इसका स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि देश की राजनीति को स्वस्थ रखना है तो शीर्ष नेताओं को आगे आकर इस तरह की पहल करनी ही होगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विभिन्न राजनीतिक दल इस नसीहत पर अमल करते हैं या फिर चुनावी लाभ के लिए वही पुरानी आक्रामक शैली जारी रखते हैं। बहरहाल, राजनाथ सिंह और वेंकैया नायडू के इस वैचारिक संदेश ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित कर दिया है कि भारतीय लोकतंत्र की असली ताकत इसकी सहनशीलता और आपसी सम्मान की परंपरा में ही निहित है।
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