दीपोत्सव के लिए तैयारियों का श्रीगणेश
अयोध्या नगरी में दसवें वार्षिक दीपोत्सव के आयोजन हेतु औपचारिक रूप से प्रक्रिया का आरंभ हो गया है। सरयू नदी के तट पर भूमि पूजन के संपन्न होने के साथ ही इस बड़े धार्मिक अनुष्ठान की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इस बार का मुख्य उद्देश्य सरयू के किनारों और राम की पैड़ी के पवित्र क्षेत्र को करीब 30 लाख दीपों की रोशनी से जगमगाना है। आयोजन को सफल बनाने की जिम्मेदारी राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। इस विश्वविद्यालय के लगभग 35 हजार छात्र और स्वयंसेवक इस कार्य में पूरी निष्ठा के साथ अपना योगदान देंगे। दीपों को सही ढंग से व्यवस्थित करने से लेकर उन्हें प्रज्ज्वलित करने तक की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं स्वयंसेवकों के कंधों पर रहेगी। कार्यक्रम स्थल पर दीपों की कतारें सजाना एक कठिन और व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसके लिए अब कार्य योजना पर अमल शुरू हो गया है। प्रशासन और विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि इस आयोजन को भव्यता देने के लिए निरंतर समन्वय कर रहे हैं ताकि सरयू तट का दृश्य अविस्मरणीय बन सके।
विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका
इस विशाल आयोजन में राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो। विजेंद्र सिंह ने मार्गदर्शक की भूमिका संभाली है। उन्होंने स्वयं विश्वविद्यालय के शिक्षकों और हजारों स्वयंसेवकों के साथ मिलकर भूमि पूजन की रस्म पूरी की। इसके उपरांत मां सरयू की विशेष पूजा अर्चना की गई ताकि कार्यक्रम निर्विघ्न संपन्न हो सके। करीब 35 हजार स्वयंसेवकों की इतनी बड़ी टीम को कार्य सौंपना और उन्हें अनुशासित करना अपने आप में एक बड़ा प्रशासनिक प्रबंधन है। इन स्वयंसेवकों को अलग-अलग स्थान आवंटित किए जाएंगे जहां उन्हें निर्धारित समय पर दीप रखने और जलाने होंगे। केवल दीप जलाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें इस कलात्मक ढंग से रखा जाएगा कि पूरी अयोध्या नगरी दीपों की रोशनी में दिव्य दिखाई दे। प्रत्येक स्वयंसेवक को अपने आवंटित क्षेत्र में सफाई और व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। आयोजन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कैसे ये हजारों हाथों वाली टीम तालमेल बिठाकर लाखों दीपों को एक साथ जलाती है और पूरे परिसर को एक दिव्य आभा प्रदान करती है।
पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की चुनौती
अयोध्या के दीपोत्सव का यह दसवां संस्करण पिछले कीर्तिमानों को चुनौती देने के लिए तैयार है। नौवें दीपोत्सव के दौरान कुल 26 लाख 17 हजार 215 दीपों को एक साथ प्रज्ज्वलित करके एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। इस बार का लक्ष्य पिछली संख्या से 3 लाख 82 हजार 785 दीप अधिक रखने का है ताकि एक नई ऊंचाई हासिल की जा सके। यह संख्यात्मक चुनौती पूरे आयोजन को और अधिक रोमांचक बनाती है क्योंकि हर दीप का महत्व उसकी व्यवस्था और स्थान पर निर्भर करता है। पिछले वर्ष की सफलता के बाद अब अवध विश्वविद्यालय की टीम के सामने खुद के ही बनाए हुए आंकड़ों को पीछे छोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी है। इस बार सरयू तट और राम की पैड़ी पर उमड़ने वाली भीड़ और दीपों की जगमगाहट का दृश्य देखने के लिए सभी उत्साहित हैं। यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा का पालन ही नहीं है, बल्कि सामूहिक मेहनत और अनुशासन का एक अनूठा उदाहरण भी है।