विभिन्न विभागों में नए पदों का सृजन
हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बिजली क्षेत्र के निजीकरण को लेकर जारी भारी विरोध और गतिरोध के बीच मध्य प्रदेश की सरकार ने पूरी तरह से अलग रास्ता चुना है। राज्य प्रशासन का मुख्य ध्यान केवल निजी कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय हर क्षेत्र में सरकारी संस्थाओं और मजबूत प्रशासनिक संरचनाओं का विस्तार करने पर है। अपने कार्यकाल के पौने तीन साल के दौरान मौजूदा सरकार ने चौदह नए बोर्डों को धरातल पर उतारा है जिन पर लगातार काम चल रहा है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए विभिन्न प्रशासनिक विभागों के भीतर एक लाख चौबीस हजार नए पदों को सृजित करने का बड़ा निर्णय लिया गया है। इन नए पदों के साथ साथ पहले से रिक्त चल रहे पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी लगातार जारी है ताकि युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिल सकें। इस पूरी कवायद का उद्देश्य राज्य के बेरोजगार युवाओं को सरकारी क्षेत्र में काम करने के ज्यादा से ज्यादा मौके उपलब्ध कराना है ताकि प्रशासनिक कामकाज भी सुचारू रूप से चल सके।
विकास प्राधिकरणों और निगमों का गठन
राजधानी भोपाल में बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई की तर्ज पर भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाने की प्रक्रिया चल रही है जिसके माध्यम से भोपाल शहर के साथ साथ आसपास के चिह्नित जिलों का समन्वित औद्योगिक विकास किया जाएगा। इसी प्रकार इंदौर और उज्जैन तथा उनके नजदीकी जिलों के चहुंमुखी विकास के लिए भी एक अलग प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। हाल ही में जबलपुर और इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी के गठन को भी आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी गई है जिसका मुख्य लक्ष्य मौजूदा मुख्य मार्गों के किनारों पर आधुनिक औद्योगिक सेक्टर विकसित करना है। सरकार के नियंत्रण वाली इक्कीस बस सेवाओं को नए रूप में जमीन पर उतारने के लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड का गठन किया गया है जिसके जरिए चुनिंदा मार्गों पर बसों का संचालन विधिवत शुरू कर दिया गया है। नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए नमन मिशन का पंजीयन एक स्वायत्त संस्था के रूप में किया जा रहा है जो नदी को बचाने के लिए विशेष कार्य करेगी। पुलिस विभाग में भर्तियों को स्वतंत्र रूप से संचालित करने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन किया जाना अभी बाकी है।
प्रशासनिक सुधार और भविष्य की जरूरतें
आम जनता को संभाग, जिला और तहसीलों की सीमाओं के निर्धारण में बरसों से आ रही दिक्कतों और रिकॉर्ड की गड़बड़ी से राहत दिलाने के वास्ते पहली बार एक विशेष प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया है। यह आयोग अन्य कई राज्यों की व्यवस्थाओं का गहन अध्ययन कर चुका है ताकि सीमाओं का निर्धारण पूरी पारदर्शिता के साथ नए सिरे से किया जा सके। इसके अलावा संभागीय स्तर पर लोक परिवहन सेवाओं के नियंत्रण के लिए संभागीय परिवहन कंपनियों को भी नए सिरे से खड़ा करने की प्रक्रिया इस समय जारी है। केवल लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत ही सैंतालीस हजार पद कैबिनेट से स्वीकृत किए गए हैं जिनमें सबसे बड़ी संख्या नियमित पदों की है और कुछ पदों पर संविदा तथा आउटसोर्स के जरिए भी व्यवस्था की जा रही है। पूर्व मुख्य सचिव शरदचंद्र बेहार का कहना है कि जब तक राज्य का हर परिवार पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं बनता तब तक समग्र रूप से पूरा राज्य आत्मनिर्भर नहीं हो सकता है। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के साधन जमीनी स्तर पर पहुंचाने के लिए दूरगामी और विकेंद्रीकृत योजनाओं के साथ अत्यंत तेज गति से काम करने की सख्त जरूरत है ताकि आने वाली हर चुनौती का डटकर मुकाबला किया जा सके।