महोत्सव का समापन और संगीत की गूंज
मेहरानगढ़ दुर्ग की ऐतिहासिक दीवारों के भीतर पांच दिनों तक चला जोधपुर राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल सोमवार सुबह साढ़े सात बजे आधिकारिक तौर पर संपन्न हो गया। यह आयोजन शरद पूर्णिमा के अवसर पर विविध संगीत परंपराओं का एक अनूठा केंद्र बना रहा। रविवार की रात जनाना कोर्टयार्ड और जसवंत थड़ा जैसे स्थानों पर अनेक प्रस्तुतियां दी गईं। महोत्सव के अंतिम दिन का समापन सोमवार की सुबह जसवंत थड़ा में गायन सत्र के साथ हुआ। मनप्रीत सिंह ने भोर के समय अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन में रविवार को दिनभर विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का सिलसिला जारी रहा। जसवंत थड़ा पर चांदनी के दौरान मूनराइज नामक कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसने माहौल को संगीतमय बना दिया। रात को मेहरानगढ़ के जनाना कोर्टयार्ड में इनसाइट्स शीर्षक से कई कलाकारों ने अपनी प्रतिभा दिखाई। आधी रात के बाद भी संगीत की महफिलें पूरी ऊर्जा के साथ चलती रहीं।
विभिन्न देशों के कलाकारों का संगम
रविवार के कार्यक्रमों में भारतीय और विदेशी संगीतज्ञों की जुगलबंदी आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। शाम पौने सात बजे से जनाना कोर्टयार्ड में इनसाइट्स सत्र शुरू हुआ जिसमें सितार के उस्ताद अंबी सुब्रमण्यम और फिनलैंड की एमिलिया लाजुनेन ने अपनी कला बिखेरी। एस्टोनियाई जोड़ी पूलुलुप के साथ-साथ राजस्थानी लोक कलाकार आसिन खान लंगा ने भी मंच साझा किया। रात पौने ग्यारह बजे रिफ रस्ल नामक विशेष प्रस्तुति में विविध संगीत शैलियों का मिलन हुआ। इसे कोलंबिया के किला बिटमेकर और ऑस्ट्रेलियाई मूल के फिलिपिनो कलाकार डॉबी ने संयोजित किया था। इस आयोजन में पियानोवादक मर्लिन डिसूजा के साथ राजस्थान के पारंपरिक ढोलक और खड़ताल वादकों को भी स्थान मिला। रात की रोशनी ने इस अनूठे संगीत संगम को और भी अधिक प्रभावशाली बना दिया। महोत्सव का उद्देश्य केवल मंच तक सीमित न रहकर ऐतिहासिक स्थलों और प्रकृति के साथ संगीत को जोड़ना रहा है।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और उद्देश्य
जोधपुर में आयोजित इस महोत्सव का मुख्य लक्ष्य राजस्थान की पारंपरिक लोक कलाओं को सहेजना और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाना है। मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय मांगणियार और लंगा समुदायों के कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किया जाता है। विदेशी संगीतकारों के साथ मिलकर प्रस्तुति देने से राजस्थानी लोक संगीत को नई ऊंचाइयां मिलती हैं। अंतिम दिन सुबह साढ़े पांच बजे से शुरू हुए जे रिफ डाउंस कार्यक्रम ने समापन में एक विशेष गरिमा जोड़ दी। इस तरह के आयोजनों के माध्यम से ऐतिहासिक स्मारकों का उपयोग संगीत की विभिन्न विधाओं को जीवंत रखने के लिए किया जाता है। महोत्सव का बीसवां संस्करण सोमवार सुबह सात बजकर तीस मिनट पर समाप्त हुआ। हर वर्ष की तरह इस बार भी शरद पूर्णिमा की चांदनी ने कार्यक्रमों के प्रभाव को कई गुना बढ़ा दिया और कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से लोक परंपराओं का संदेश दूर-दूर तक पहुंचाया।