युद्ध के टैंक वाला लोकप्रिय बाजार
झारखंड की राजधानी रांची में स्थित सैनिक मार्केट एक बेहद मशहूर वाणिज्यिक परिसर है जो अपनी खास विशेषताओं के कारण हमेशा चर्चा का केंद्र बना रहता है। इस बाजार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आने वाले लोगों को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में इस्तेमाल किया गया एक असली टैंकर देखने को मिलता है। यह टैंक इस पूरे परिसर में आने वाले सभी आगंतुकों के लिए मुख्य आकर्षण का बड़ा केंद्र रहता है। इस अनोखे बाजार की स्थापना के पीछे एक बहुत बड़ा सामाजिक और परोपकारी उद्देश्य जुड़ा हुआ है। इसकी शुरुआत मुख्य रूप से भारतीय सेना के सेवानिवृत्त जवानों को सुविधाएं प्रदान करने और उनके कल्याण कार्यों के वास्ते वित्तीय सहायता जुटाने के लिए की गई थी। इस परिसर के भीतर प्रवेश करते ही नागरिकों को एक अलग प्रकार के अनुशासन और देशभक्ति का अहसास होता है। यहां पर पिछले तेईस साल से अपनी दुकान चला रहे विक्रेता अमृतेश के अनुसार इस स्थान पर संचालित होने वाली प्रत्येक दुकान से मिलने वाला सारा किराया सीधा सैनिक कल्याण बोर्ड के खातों में जमा किया जाता है। उस राशि का उपयोग देश की रक्षा करने वाले पूर्व सैनिकों की विभिन्न प्रकार से सहायता करने में किया जाता है। सैनिक कल्याण बोर्ड में सभी सदस्य भूतपूर्व सैनिक ही होते हैं जो मिलकर इस संपूर्ण बाजार का संचालन करते हैं।
खरीदारी के विकल्प और कल्याणकारी योजनाएं
इस बाजार के अंदर ग्राहकों के लिए विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की लगभग एक सौ बीस से एक सौ तीस दुकानें संचालित होती हैं। यहां आने वाले खरीदार मुख्य रूप से जूतों के विशाल और जबरदस्त संग्रह का आनंद ले सकते हैं जो कि इस परिसर की प्रमुख विशेषता है। इन दुकानों पर बड़े-बड़े नामी ब्रांड्स के रिप्लिका जूते बेहद कम कीमतों पर बिकते हैं जिन्हें देखकर एक नजर में असली होने का धोखा हो जाता है। ये बेहतरीन जूते केवल दो सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक की किफायती रेंज में आसानी से मिल जाते हैं। जूतों के अलावा इस व्यापारिक केंद्र में कपड़ों की दुकानें, मोटरसाइकिल मरम्मत की दुकानें, कार सहायक उपकरण, रेस्टोरेंट और चाय की दुकानें भी मौजूद हैं। इसके साथ ही यहां पर रांची का सबसे बड़ा दवाखाना जिसका नाम आजाद फर्मा है वह भी स्थित है। इन सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से मिलने वाले किराए के पैसों का उपयोग कई प्रकार के कल्याणकारी कार्यों को पूरा करने में किया जाता है। यदि देश की रक्षा करते हुए कोई सैनिक युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो जाता है तो उसके परिवार को तुरंत दो लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। इसके अलावा युद्ध के दौरान विकलांग हो जाने के कारण जिन सैनिकों को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ती है उनके परिवारों की भी पूरी मदद की जाती है। शहीद होने वाले जवानों की विधवा पत्नियों को हर महीने दस हजार रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है ताकि उनका जीवनयापन सुगम हो सके।
पूर्व सैनिकों को संबल और इतिहास
यह अनूठा वाणिज्यिक परिसर केवल दुकानों का समूह नहीं बल्कि संकट के समय पूर्व सैनिकों के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक संबल है। जिन भूतपूर्व सैनिकों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब होती है उनके घरों की मरम्मत कराने के लिए धन दिया जाता है। इसके अतिरिक्त उनके रसोई घर के खर्च और घर की अन्य जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी सहायता राशि उपलब्ध कराई जाती है। जिन सैनिकों को किसी कारणवश पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है उन्हें भी हर महीने नियमित रूप से आर्थिक मदद दी जाती है। इस प्रकार से यह संपूर्ण रांची शहर का इकलौता ऐसा बाजार है जो पूरी तरह से देश के वीर सैनिकों के लिए समर्पित है। इतिहास की बात करें तो यह प्रसिद्ध मार्केट वर्ष 1991 में पूरी तरह से बनकर तैयार हुआ था और तभी से यह शहर के सबसे लोकप्रिय बाजारों में शुमार है। इस परिसर में आने वाले नागरिक खरीदारी के साथ-साथ राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले वीरों के प्रति सम्मान का भाव भी महसूस करते हैं। दुकानों के किराए से चलने वाले इन जनहित कार्यों के कारण इस व्यापारिक केंद्र का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।