उदयपुर में पानी की गंभीर किल्लत
झीलों की नगरी के नाम से अपनी खास पहचान रखने वाले उदयपुर शहर के विभिन्न हिस्सों में आज जनता पानी के भारी संकट का सामना कर रही है। हालात इस हद तक गंभीर हो चुके हैं कि कई आवासीय क्षेत्रों के अंदर लोगों को तीन दिन से भी अधिक समय के लंबे अंतराल के बाद पानी नसीब हो रहा है। पाइपलाइन में पानी का दबाव बहुत कम रहने के कारण घरों तक पर्याप्त मात्रा में पानी बिल्कुल नहीं पहुंच पा रहा है। इसका सीधा और बुरा असर अब शहर के आम नागरिकों की दैनिकचर्या के ऊपर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से घर की महिलाओं के लिए रसोई चलाने से लेकर अन्य सभी जरूरी घरेलू कामकाज संभालना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। इस मौजूदा संकट की वजह से स्थानीय निवासियों के सामने अपनी जरूरत के मुताबिक पानी का भंडारण करने के लिए भी काफी ज्यादा मशक्कत करने की नौबत आ गई है। शहर के जगदीश चौक और भटियाणी चौहट्टा जैसे प्रमुख इलाकों के अंदर लगभग 75 घंटे के लंबे अंतराल पर पानी की सप्लाई होने की दुखद और परेशान करने वाली बातें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि जब विभाग की तरफ से पानी की सप्लाई की जाती है, तब भी नलों में पानी का दबाव बहुत कम होता है। कम दबाव की इस निरंतर समस्या के चलते कई घरों तक जरूरी पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच पाती है।
त्योहार के दिनों में बढ़ी मुश्किलें
वर्तमान समय में देश भर के साथ उदयपुर में भी दिवाली का पावन त्योहार बेहद नजदीक आ चुका है और ऐसे में इस गंभीर पानी की समस्या ने स्थानीय लोगों की चिंता को और अधिक बढ़ा दिया है। जब ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान अलग-अलग बस्तियों में पहुंचकर महिलाओं से बातचीत की गई, तो उन्होंने अपनी गंभीर परेशानियों का खुलकर ब्योरा दिया। महिलाओं का स्पष्ट रूप से यह कहना है कि अगर घर के अंदर समय पर पानी नहीं आता है, तो रसोई के जरूरी काम से लेकर कपड़े धोने, घर की साफ-सफाई करने और दूसरे तमाम आवश्यक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं। त्योहारी सीजन के इन खास दिनों के दौरान घर की साफ-सफाई और अन्य जरूरी तैयारियों को पूरा करने के लिए सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक पानी की आवश्यकता होती है। लेकिन मौजूदा बदतर हालात के बीच लोगों के लिए अपने घर के रोजमर्रा के छोटे-मोटे काम पूरे करना भी एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है। इसके अलावा स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कुछ लोग अपने निजी मकानों के अंदर मोटर या बूस्टर लगा लेते हैं। पानी खींचने वाले इन उपकरणों के कारण ऊपरी मंजिलों पर या फिर अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निवास करने वाले अन्य परिवारों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। बूस्टर के इस्तेमाल की वजह से पानी के वितरण में भारी असमानता की समस्या भी खुलकर सामने आ रही है, हालांकि इस मामले में अभी संबंधित जल विभाग की तरफ से कोई भी आधिकारिक पुष्टि या फिर स्थिति को स्पष्ट करने वाला बयान सामने आना अभी पूरी तरह से बाकी है।
सर्दियों की शुरुआत और गांव लौटने की चेतावनी
अभी मौसम में सर्दियों की आधिकारिक शुरुआत भी ठीक से नहीं हो पाई है और इस शुरुआती दौर में ही पानी की इतनी भारी परेशानी शहर के लोगों के सामने मुंह बाए खड़ी हो गई है। महिलाओं ने चेतावनी भरे लहजे में यहां तक कह दिया है कि अगर आने वाले दिनों में हालात ऐसे ही बने रहे, तो उनके लिए अपने परिवार के साथ इस शहर के अंदर रहना असंभव हो जाएगा। कुछ पीड़ित महिलाओं का तो यह भी कहना है कि यदि इस गंभीर पानी की समस्या का कोई स्थाई समाधान जल्द नहीं निकाला गया, तो उन्हें मजबूर होकर अपने पैतृक गांव लौटने के बारे में गंभीरता से सोचना पड़ेगा। इस साल क्षेत्र में बारिश कम होने का सीधा और नकारात्मक असर शहर के जल संसाधनों पर पड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है। ऐसे तमाम हालातों के बीच अब शहर के तमाम परेशान नागरिकों की एकमात्र उम्मीद केवल नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति पर ही पूरी तरह से टिकी हुई है। सभी क्षेत्रवासियों की तरफ से यह पुरजोर मांग लगातार की जा रही है कि पानी की सप्लाई के निर्धारित समय और उसके कम दबाव को तुरंत सुधारा जाए। ऐसा होने पर ही शहर के हर एक घर तक जरूरत के मुताबिक पर्याप्त पानी आसानी से पहुंच पाएगा। दिवाली जैसे बड़े और महत्वपूर्ण त्योहार के आगमन से ठीक पहले यदि इस विकट जल संकट का कोई ठोस समाधान नहीं किया गया, तो आम जनता की परेशानियां और भी अधिक बढ़ सकती हैं। अब यह देखना बहुत जरूरी होगा कि जिम्मेदार सरकारी विभाग इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए आखिर कौन से त्वरित कदम उठाता है।