Lucknow Desk : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी के संगठन और भविष्य की राजनीति को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने साफ किया है कि बसपा में परिवारवाद को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। उनके भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश आनंद और अशोक समेत परिवार के किसी भी बेटे को पार्टी में कोई पद नहीं दिया जाएगा। मायावती के इस ऐलान को बसपा की राजनीति में एक अहम बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आनंद कुमार के बच्चों को भविष्य में भी पार्टी की कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उनका कहना है कि पार्टी को परिवार तक सीमित रखने के बजाय मिशन और संगठन के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। बेटी को मिल सकती है जिम्मेदारी मायावती ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर उनकी भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी में जिम्मेदारी दी जा सकती है।
दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। हालांकि, अगर वह राजनीति में आने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो किसी समर्पित दलित मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस फैसले से साफ है कि मायावती पार्टी में नेतृत्व के लिए परिवार के बजाय संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने के पक्ष में हैं। युवाओं और सर्वसमाज पर जोर बसपा सुप्रीमो ने पार्टी में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की भी बात कही है। उन्होंने संगठन में Gen-Z यानी युवा पीढ़ी को 50 प्रतिशत भागीदारी देने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले चुनावों में युवा चेहरों और सर्वसमाज को टिकट देने में प्राथमिकता की बात कही गई है। मायावती के इस कदम को पार्टी में नई ऊर्जा लाने और युवाओं को राजनीतिक अवसर देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले चुनावों में इसका असर टिकट बंटवारे और संगठन की रणनीति पर दिखाई दे सकता है। ## नेताओं की वापसी की खबरों को बताया फेक न्यूज मायावती ने पार्टी से निकाले गए नेताओं की वापसी को लेकर चल रही खबरों पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने ऐसी खबरों को फेक न्यूज बताया और कहा कि अभी किसी भी तरह की वापसी का फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि वह मान्यवर कांशीराम जी की तरह परिवारवाद के खिलाफ खड़ी हैं और पार्टी को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने देंगी। मायावती ने संगठन की मजबूती और बहुजन मिशन को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। बसपा सुप्रीमो के इस फैसले से पार्टी की आगामी रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि युवा भागीदारी, सर्वसमाज को प्रतिनिधित्व और परिवारवाद से दूरी की यह नीति आने वाले चुनावों में बसपा के प्रदर्शन को कितना प्रभावित करती है।