जुहू इलाके में अभिनेता की कार पर हमला
घटना 18 अक्टूबर की है जब मुंबई के व्यस्त और पॉश इलाके जुहू में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं। गनीमत यह रही कि इस अचानक हुए घातक हमले में अभिनेता पूरी तरह सुरक्षित बच गए और उन्हें कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा। हालांकि, इस सशस्त्र हमले के दौरान वाहन के भीतर मौजूद उनका ड्राइवर और एक व्लॉगर गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें तुरंत चिकित्सीय सहायता दी गई। घटना के तुरंत बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में मामले की जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया। वारदात की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए कई जगहों पर छापेमारी शुरू कर दी। हमलावरों की पहचान और उनकी तलाश के लिए आसपास के तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला गया जिसमें कई अहम सुराग हाथ लगे। इस शुरुआती कार्रवाई के तहत पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए तीन संदिग्धों को चिन्हित किया और घटना के ठीक अगले दिन उन्हें राजस्थान राज्य से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की। पकड़े गए इन तीनों शुरुआती आरोपियों की पहचान फूल सिंह, रेहान रहिसुद्दीन अंसारी और ऋतिक महतो के रूप में हुई है जिनकी उम्र 18 से 22 वर्ष के बीच है।
गिरफ्तारियों का दायरा और संदिग्धों से पूछताछ
पुलिस की व्यापक और सघन छानबीन के बाद इस आपराधिक मामले में शिकंजा कसता गया और गिरफ्तारियों का कुल आंकड़ा बढ़कर अब दस तक पहुंच गया है। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि हमले को अंजाम देने के बाद शूटरों को लगातार बाहरी निर्देश मिल रहे थे। जब आरोपियों के चेहरे टेलीविजन चैनलों के समाचारों पर प्रसारित होने लगे, तब उनके पास एक चेतावनी भरा संदेश पहुंचा। इस संदेश में उन्हें तुरंत अपनी छुपे हुए स्थान से निकलने के लिए कहा गया क्योंकि उनके चेहरे सार्वजनिक हो चुके थे। पुलिस अभी तक यह स्पष्ट रूप से नहीं जान पाई है कि हमलावरों को टेलीविजन समाचारों के ये ताजा अपडेट कौन भेज रहा था। लेकिन अधिकारियों को पूरा शक है कि रेहान अंसारी नाम के संदिग्ध को किसी विशेष संचार ऐप के माध्यम से निर्देश दिए जा रहे थे। इन निर्देशों को देने वाला व्यक्ति या तो अनिल पंडित हो सकता है जो खुद को लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का सक्रिय गुर्गा बताता है, या फिर वे लोग हो सकते हैं जिन्हें सोनीपत से हाल ही में दबोचा गया था। सोनीपत में गिरफ्तार किए गए अंकित खटक और समीर खत्री पर आरोप है कि उन्होंने हमलावरों और मुख्य पंडित के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, अपराधियों द्वारा इंटरनेट प्रोटोकॉल आधारित वॉयस कॉलिंग और मैसेजिंग एप्लीकेशन का उपयोग किया जा रहा था।
कम्युनिकेशन ऐप का इस्तेमाल और गिरोह के दावे
तकनीकी मामलों की जांच कर रही एजेंसियों के सामने यह बात आई कि अपराधी बातचीत के लिए ऐसे अत्याधुनिक मैसेजिंग प्लेटफार्मों का सहारा ले रहे थे जिनमें मोबाइल नंबर दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती है। माना जाता है कि बिश्नोई गिरोह अक्सर सिग्नल या आर्मेनिया में निर्मित जंगी नामक गोपनीय ऐप का उपयोग करता है। सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध रेहान को लगातार अपने फोन पर किसी से लंबी बातचीत करते हुए और निर्देश लेते देखा गया है। हालांकि पुलिस ने शुरुआती दौर में यह आधिकारिक तौर पर नहीं बताया था कि किस विशिष्ट मैसेजिंग माध्यम का उपयोग किया गया था, लेकिन अब आरोपियों की हिरासत के बाद कुछ बातचीत के डिजिटल प्रमाण हाथ लग गए हैं। दूसरी ओर, अनिल पंडित नामक एक शख्स ने सोशल मीडिया पर सरेआम एक पोस्ट साझा करते हुए इस पूरे हमले की जिम्मेदारी लेने का दुसाहसपूर्ण दावा किया था। वह सार्वजनिक रूप से खुद के तार कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई आपराधिक नेटवर्क से जुड़े होने की बात कहता फिरता है। हालांकि, मुंबई पुलिस ने सोशल मीडिया पर किए गए इस तथाकथित दावे की अभी तक आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है। कानून प्रवर्तन एजेंसियां और तमाम जांच दल इस बात का पर्दाफाश करने में जुटे हैं कि इस सुनियोजित हमले के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन था और शूटरों को पल-पल की खबर कौन दे रहा था।