लखनऊ में केंद्रीय एजेंसी की बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के जोनल कार्यालय में कार्यरत दो लोगों पर घूस मांगने के संगीन इल्जाम सामने आए हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बड़ी योजना बनाकर जाल बिछाया और इन दोनों आरोपियों को शिकंजे में ले लिया। पकड़े गए आरोपितों में एक हेड कांस्टेबल और एक प्रवर्तन अधिकारी शामिल बताए जाते हैं। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने एक मामले में राहत देने की एवज में भारी रकम ऐंठे जाने की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई अंजाम दी। शिकायतकर्ता के पिता से इस काम के बदले पांच लाख रुपये की मांग की गई थी। शिकायत मिलने के फौरन बाद केंद्रीय एजेंसी के दस्ते हरकत में आए और पूरी योजना तैयार की गई। निर्धारित योजना के तहत ही हेड कांस्टेबल को रिश्वत की रकम अपने हाथों में लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया गया। इस सफलता के तुरंत बाद ही संबंधित प्रवर्तन अधिकारी को भी शिकंजे में ले लिया गया। शुरुआती जांच के दौरान सामने आया कि यह पूरा मामला लखनऊ स्थित जोनल कार्यालय से ही संचालित हो रहा था। एजेंसी के अधिकारियों ने मौके से ही दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ और छानबीन शुरू कर दी है।
समन के मामले में राहत का सौदा
शिकायतकर्ता के परिवार के एक सदस्य को इसी वर्ष अगस्त और सितंबर के महीनों में दो बार समन भेजे गए थे। यह समन लखनऊ के जोनल कार्यालय की तरफ से जारी किए गए थे जिसके बाद से ही यह पूरा प्रकरण शुरू हुआ। इन समनों से जुड़ी किसी कानूनी उलझन या मामले में मदद करने का झांसा दिया गया था। इसी बात का फायदा उठाकर आरोपियों ने पीड़ित पक्ष से पांच लाख रुपये की भारी रकम वसूलने की साजिश रची। प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार की तरफ से हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी ने इस अवैध लेनदेन के लिए पूरी बातचीत संभाली थी। मनोज द्विवेदी मूल रूप से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान हैं और प्रतिनियुक्ति पर इस दफ्तर में अपनी सेवाएं दे रहे थे। जब पीड़ित परिवार ने इस अनुचित मांग का विरोध किया और केंद्रीय एजेंसी तक अपनी बात पहुंचाई तो फौरन कदम उठाए गए। एजेंसी ने तेरह अक्टूबर को इस सिलसिले में आधिकारिक तौर पर मामला दर्ज कर लिया और जाल बिछाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। निर्धारित रणनीति के अनुसार जब हेड कांस्टेबल रिश्वत की रकम लेने पहुंचा तो टीम ने उसे तुरंत पकड़ लिया। इसके बाद दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
अन्य कर्मियों की भूमिका की जांच शुरू
भ्रष्टाचार के इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से ही केंद्रीय एजेंसी के भीतर और बाहर हड़कंप का माहौल देखा जा रहा है। जांच अधिकारी अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि इस अवैध लेनदेन में और कौन-कौन लोग शामिल थे। लखनऊ कार्यालय से जुड़े अन्य अधिकारियों की संभावित संलिप्तता की भी बेहद बारीकी से जांच की जा रही है। एजेंसी इस बात के पुख्ता सबूत जुटा रही है कि यह रिश्वतखोरी केवल इन दोनों तक सीमित थी या इसका दायरा और बड़ा था। लेनदेन से जुड़े तमाम डिजिटल और कागजी साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच भी प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। फिलहाल दोनों कर्मचारियों पर लगे तमाम गंभीर आरोपों की फाइल तैयार की जा रही है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। विधिक प्रक्रियाओं के मु मुकम्मल होने के बाद ही इनकी आगे की विभागीय जिम्मेदारी और सजा तय की जाएगी। आम जनता के बीच इस घटना से प्रशासनिक महकमों में पारदर्शिता और ईमानदारी को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। केंद्रीय एजेंसी का कहना है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।