रिहायशी बस्ती में मिला पटाखों का भारी जखीरा
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के भीतर एक सघन बसी हुई आबादी के बीच बारूद का खतरनाक जखीरा जमा किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली इस स्थिति की भनक लगते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और तुरंत एक बड़ी छापेमारी की योजना बनाई गई। शुक्रवार की रात को पुलिस दलों ने शहर के बाईपास रोड पर स्थित एक संदिग्ध परिसर को अचानक घेर लिया। इस इलाके में भारी मात्रा में प्रतिबंधित और अवैध रूप से संग्रहित आतिशबाजी छिपाकर रखी गई थी। थाना प्रभारी सतीश सिंह के नेतृत्व में पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर जब ताबड़तोड़ दबिश दी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। घनी आबादी के बेहद करीब इस प्रकार खुलेआम बारूद और पटाखों के डिब्बे डंप किए गए थे, जिससे किसी भी समय बहुत बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई थी। पुलिस ने बिना किसी देरी के मौके पर पहुंचकर पूरी स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया और तलाशी अभियान शुरू कर दिया।
ग्वालियर से ट्रक के जरिए आया था खतरनाक सामान
पुलिस की शुरुआती जांच-पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि पटाखों की यह बड़ी खेप ट्रकों के माध्यम से सीधे ग्वालियर शहर से छतरपुर भेजी गई थी। जब अधिकारियों ने इस माल के परिवहन और भंडारण से जुड़े जरूरी अनुमति पत्रों की मांग की, तो वहां मौजूद लोग कोई भी वैध कागजात या ई-वे बिल नहीं दिखा सके। पूछताछ के दौरान यह बात भी सामने आई कि यह पूरा कंसाइनमेंट प्रतीक रावत के नाम से बुक किया गया था। जिस गोदाम के भीतर यह विस्फोटक सामग्री रखी हुई थी, वह परिसर मूल रूप से विनोद कुशवाहा की संपत्ति है। इस भवन को बृजेश वर्मा ने किराए पर लिया हुआ था और वे वहां संदीप ट्रांसपोर्ट के नाम से माल ढुलाई और भंडारण का काम संचालित कर रहे थे। अधिकारियों ने पाया कि इस ट्रांसपोर्ट गोदाम में बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के और जिला प्रशासन से भंडारण के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए बिना ही यह ज्वलनशील सामग्री रखी गई थी। पुलिस टीम ने कागजातों की गैरमौजूदगी को देखते हुए मौके पर ही आगे की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी और गोदाम को सील करने की कार्रवाई को अंजाम दिया।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर पुलिस का कड़ा रुख
जिला पुलिस अधीक्षक के सख्त निर्देशों के बाद इस पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि घनी बस्तियों के नजदीक इस तरह से भारी मात्रा में विस्फोटक छिपाकर रखना कानूनन अपराध है और इससे आम जनता की जान को बड़ा खतरा पैदा हो गया था। गोदाम के अंदर कुल 100 कार्टून बारूद के पटाखे भरे हुए थे, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने इन सभी अवैध पटाखों को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया है। ट्रांसपोर्ट संचालक और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। प्रशासन ने शहर के अन्य ट्रांसपोर्ट संचालकों को भी चेतावनी दी है कि वे अपने परिसरों में किसी भी तरह की ज्वलनशील या अवैध सामग्री का भंडारण न करें। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि ग्वालियर से यह खेप किसके इशारे पर भेजी गई थी और इसके पीछे कौन सा बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।