चार अपराधियों के जेल बदलने की तैयारी
मेरठ के चर्चित हत्याकाण्डों में अदालत द्वारा मृत्युदंड पाए चार दोषियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। जिला जेल के वरिष्ठ अधीक्षक डॉ। वीरेश राज शर्मा ने इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव लखनऊ स्थित कारागार महानिदेशक कार्यालय को प्रेषित किया है। इन चारों अपराधियों को अलग-अलग कारावासों में भेजने की योजना बनाई गई है ताकि सुरक्षा एवं प्रशासनिक कारणों से उन्हें एक साथ न रखा जाए। प्रस्तावित योजना के तहत मुस्कान और रविता को लखनऊ की महिला जेल भेजने की तैयारी है, जबकि साहिल और अमरदीप को आगरा कारागार भेजा जाएगा। यह स्थानांतरण तभी संभव होगा जब संबंधित जेलों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो और विभागीय औपचारिकताएं पूर्ण हो जाएं। वर्तमान में जेल प्रशासन प्रतीक्षा सूची में शामिल अन्य कैदियों के स्थानांतरण के बाद ही इन दोषियों को स्थानांतरित करने की तैयारी कर रहा है। चारों अपराधी अपनी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर चुके हैं और कानूनन अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
हत्याकांडों का ब्यौरा और न्यायिक स्थिति
इन दोषियों को वर्ष 2025 में घटित दो अलग-अलग जघन्य हत्याकांडों के लिए सजा मिली है। सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान और साहिल को दोषी पाया गया था, जिन्हें 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने फांसी पर लटकाने का दंड सुनाया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों ने सौरभ के सीने में धारदार चाकू घोंपकर हत्या की थी और शव को टुकड़ों में काटकर प्लास्टिक के नीले ड्रम में सीमेंट तथा रेत के साथ भर दिया था। वहीं, अमित कश्यप की हत्या के मामले में रविता और अमरदीप को 16 अक्टूबर 2026 को मृत्युदंड दिया गया था। उन्होंने अमित को नशीला दूध पिलाकर बेहोश किया और गला घोंटकर उसकी जान ली थी, जिसके बाद हत्या को सांप के काटने का रूप देने के लिए कमरे में घोड़ा पछाड़ सांप छोड़ दिया था। दोनों ही मामलों में दोषियों के अधिवक्ताओं, सुशील शुक्ला, निधि त्रिवेदी और रविकेंद्र प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट में अपील दर्ज कराई है, जहां सुनवाई की तारीखों को लेकर प्रक्रिया जारी है।
न्यायिक प्रक्रिया और आगे की राह
जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे के मुताबिक, इन चारों दोषियों की फांसी की सजा पर मुहर लगाने के लिए मामले हाईकोर्ट में लंबित हैं। भारतीय कानून के तहत मृत्युदंड के मामलों की पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय का अनुमोदन अनिवार्य है। उच्च न्यायालय द्वारा निर्णय लिए जाने के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है, जहाँ दोषियों को कानूनी राहत पाने का अंतिम विकल्प मिल सकता है। जेल विभाग का कहना है कि नियमों का पालन करते हुए ही इन बंदियों को स्थानांतरित किया जाएगा ताकि व्यवस्था बनी रहे। वर्तमान में ये सभी कैदी मेरठ जेल में बंद हैं, लेकिन प्रशासनिक सुधारों के तहत उन्हें जेल से दूर करने का निर्णय लिया गया है। इस स्थानांतरण से न केवल सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि जेल प्रशासन की नियमित कार्यप्रणाली भी व्यवस्थित रहेगी। इन सभी दोषियों के वकीलों ने हाईकोर्ट में अपने पक्ष रखे हैं और वे मामले की सुनवाई से जुड़ी हर छोटी जानकारी पर पैनी नजर रख रहे हैं ताकि दोषियों के लिए उचित कानूनी पैरवी की जा सके।