लखनऊ। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपने दूसरे दिन के दौरे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। राजनाथ सिंह की प्रेस वार्ता पर तंज कसते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि लखनऊ में सत्ताधारियों की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही है, जिसके पीछे लखनऊ की राजनीति में बदलाव की तैयारी हो सकती है।
अखिलेश यादव ने कहा- दिल्ली के इंजन ने लखनऊ की कमान संभाल ली
अखिलेश यादव ने लिखा,
“सुना है सत्ताधारियों की तरफ़ से कोई बड़ी प्रेस-कांफ्रेंस हो रही
है। लगता है ‘लखनऊ-एक्सप्रेस’ का इंजन फ़ेल हो गया है, तभी दिल्ली के इंजन ने लखनऊ की कमान
किसी और को थमाने का अंदरूनी फ़ैसला कर लिया है।”
उन्होंने आगे कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखावटी है और असली कोशिश लखनऊ
के “इंजन” को खटारा साबित कर स्थायी रूप से हटाने की है। पोस्ट के अंत में
उन्होंने तंज करते हुए लिखा, “अब
लखनऊवालों की रक्षा कौन करेगा?”
आज लखनऊ में राजनाथ सिंह ने की थी प्रेस वार्ता
इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने दिल्ली में हाल के
घटनाक्रमों को लेकर कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगियों पर निशाना साधा। उन्होंने
आरोप लगाया कि युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्रनिर्माण की दिशा में लगाने के बजाय
उन्हें राजनीतिक टकराव और अराजकता की ओर धकेलने की कोशिश की जा रही है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के नौजवानों को अराजक राजनीति का मोहरा
बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल बांग्लादेश की
तर्ज पर “रेजीम चेंज” करना चाहते हैं। उनके मुताबिक, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बांग्लादेश से प्रेरणा लेने की बात कही गई, जबकि दूसरे नेता सरकार गिराने की बात
कर रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि “रेजीम चेंज” जैसे शब्दों का इस्तेमाल विपक्ष
के इरादों पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की लड़ाई चुनाव
सुधार, एसआईआर, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार या
युवाओं के भविष्य के लिए नहीं, बल्कि
देश में अराजकता पैदा कर सत्ता हासिल करने के लिए है।
‘लोकतंत्र अराजकता फैलाने का लाइसेंस नहीं’
राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी और उनके सहयोगियों से कहा कि लोकतंत्र
अराजकता फैलाने, संवैधानिक
संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाने या देश की विकास यात्रा में बाधा डालने का
लाइसेंस नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी भी इसी दिशा
में एक संकेत है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून का सम्मान जरूरी है।