यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती बस में भीषण अग्निकांड और मौतों का विवरण उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले यमुना एक्सप्रेसवे पर एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और भीषण सड़क दुर्घटना घटित हुई जब एक तेज गति से आगे बढ़ रही यात्री बस अचानक आग की चपेट में आ गई। प्राप्त विवरण के अनुसार यह वाहन बिहार राज्य के पंजीकरण नंबर वाला था जो सड़क मार्ग से अपनी निर्धारित यात्रा पर आगे बढ़ रहा था तभी उसमें किसी अज्ञात तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट के कारण लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी बस को अपनी आगोश में ले लिया जिससे वाहन के भीतर बैठे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। इस अप्रत्याशित और भयानक हादसे में कुल नौ यात्रियों की जान चली गई जबकि कई अन्य लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर चलती हुई बस से नीचे छलांग लगा दी और किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल को तुरंत इस घटना की सूचना दी गई जिसके बाद राहत दल मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
लंबी दूरी की बसों में सुरक्षा मानकों और तकनीकी जांच की अनिवार्यता इस प्रकार की दुर्दशा और सड़क दुर्घटनाएं हमारे देश के परिवहन तंत्र में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती हैं और गंभीर सवाल खड़े करती हैं। लंबी दूरी तय करने वाले यात्री वाहनों की समय-समय पर तकनीकी फिटनेस जांच, अग्नि सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और तारों की स्थिति का निरीक्षण करना वाहन मालिकों और परिवहन विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। एक्सप्रेसवे जैसे तीव्र गति वाले मार्गों पर जब इस तरह की घटनाएं होती हैं तो वाहन चालकों की तत्परता और आपातकालीन निकास द्वारों की स्थिति बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। बिहार और अन्य राज्यों के बीच चलने वाली इन बसों में अक्सर क्षमता से अधिक यात्रियों और सामानों को भरा जाता है जिससे किसी भी आपात स्थिति में बाहर निकलना कठिन हो जाता है। इस घटना के बाद एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि क्या राज्य परिवहन प्राधिकरण लंबी दूरी की निजी और अनुबंधित बसों के खिलाफ कोई कड़ा अभियान चलाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह के प्राणघातक हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके और आम जनता की यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।
प्रशासनिक कार्रवाई राहत कार्य और भविष्य के सुरक्षा कदम घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, दमकल विभाग की गाड़ियां और पुलिस बल फौरन राहत और बचाव कार्य के लिए दुर्घटना स्थल की तरफ रवाना हुए। आग पर काबू पाने के बाद जले हुए वाहन के अंदर फंसे शवों को बाहर निकाला गया और घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती कराया गया जहां उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने घोषणा की है कि इस पूरे मामले की गहन तकनीकी जांच की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बस में आग लगने का वास्तविक कारण क्या था और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई थी। बिहार से ताल्लुक रखने वाले इस वाहन के पंजीकरण और दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सभी नियम कायदों का पालन हो रहा था या नहीं। इसके साथ ही सरकार और परिवहन विभाग द्वारा पीड़ित परिवारों को उचित सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है तथा ऐसे हादसों से निपटने के लिए एक्सप्रेसवे पर त्वरित प्रतिक्रिया दल को और अधिक मुस्तैद करने के निर्देश दिए गए हैं।