अलवर मंडल में डाक सेवाओं की वर्तमान स्थिति
विश्व डाक दिवस के अवसर पर नौ अक्टूबर को डाक विभाग की प्रासंगिकता और सेवा विस्तार पर चर्चा की जा रही है। अलवर मंडल के अंतर्गत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सात सौ चौंतीस से अधिक डाककर्मी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जिले में रोजाना औसतन दस से बारह हजार आर्टिकल की डिलीवरी सुनिश्चित की जाती है। विभाग का नेटवर्क शहर की तंग गलियों से लेकर सुदूर गांवों और ढाणियों तक फैला हुआ है। मोबाइल और इंटरनेट के दौर में भी डाक विभाग अपनी व्यापक पहुंच के कारण निजी लॉजिस्टिक कंपनियों को कड़ी चुनौती दे रहा है। डाककर्मियों की सक्रियता के कारण ही पत्रों के अलावा अब स्पीड पोस्ट, पार्सल, आधार अपडेशन, बैंकिंग और बीमा सेवाएं सुलभ हो गई हैं। जिले के इंक्यावन पोस्टमैन शहर की डाक व्यवस्था संभालते हैं, जबकि छह सौ तिरासी ग्रामीण डाक सेवक दूर-दराज के इलाकों में संपर्क का माध्यम बने हुए हैं। आज भी पोस्ट बॉक्स का उपयोग चिट्ठियां डालने के लिए किया जाता है, जिनकी निगरानी अब आधुनिक फिंगरप्रिंट आधारित तकनीकों से की जा रही है।
डिजिटल बुकिंग और तकनीकी बदलाव का प्रभाव
डाक विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में तकनीक को प्राथमिकता देते हुए करीब पैंसठ प्रतिशत बुकिंग डिजिटल माध्यमों से करना शुरू कर दिया है। इसे जल्द ही सत्तर प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। अलवर मंडल में प्रतिदिन करीब चार हजार बुकिंग हो रही है, जिसे आठ हजार तक पहुंचाने की योजना है। भिवाड़ी जैसे औद्योगिक क्षेत्र से रोजाना पांच सौ से छह सौ डाक बुक की जाती है, जिसके लिए भविष्य में सीधे दिल्ली भेजने की व्यवस्था पर मंथन चल रहा है। विभाग ने नीमराना, गिलोठ, जापानी जोन, सालारपुर और बहरोड़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को लॉजिस्टिक कारोबार के लिए चिह्नित किया है। वहां मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के माध्यम से उद्योगों को सेवा दी जा रही है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत टूल किट वितरण और निगरानी में भी डाक विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है। महिला कर्मचारियों की भागीदारी भी निरंतर बढ़ रही है, जिसमें अस्सी से अधिक महिलाएं डाक वितरण और अन्य सेवाओं में अपना योगदान दे रही हैं।
वित्तीय सेवाएं और बचत योजनाओं का विस्तार
डाक विभाग अब केवल पत्रों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिले में एक बड़े वित्तीय संस्थान के रूप में उभरा है। वर्तमान में डाक विभाग की बचत बैंक योजनाओं से छह लाख पचास हजार से ज्यादा खाते जुड़े हुए हैं। इनमें सुकन्या समृद्धि योजना के एक लाख बीस हजार, सीनियर सिटीजन के दस हजार सात सौ, बचत बैंक के एक लाख पच्चीस हजार और आरडी के तीन लाख खाते शामिल हैं। ग्रामीण डाक सेवक इन सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाकर बैंकिंग और बीमा के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं। अलवर शहर में उनसठ डाकघर स्थित हैं, जिनमें से सैंतालीस स्थानों पर वितरण और बुकिंग दोनों की सुविधाएं उपलब्ध हैं। ई-कॉमर्स और स्टार्टअप की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए डाक विभाग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पार्सल भेजने की सुविधा भी प्रदान कर रहा है। आने वाले समय में डाक विभाग अपने नेटवर्क के माध्यम से वित्तीय और जन-केंद्रित सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के प्रयासों में जुटा है, जिससे आम जनता को हर संभव लाभ मिल सके।