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धर्मशाला में किसानों का आक्रोश: कॉरपोरेट भारत छोड़ो के नारों से गूंजा मैदान, नीतियों के खिलाफ फूटा गुस्सा

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में किसानों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करते हुए 'कॉरपोरेट भारत छोड़ो' के नारे लगाए। उन्होंने सरकार की कृषि नीतियों और निजी कंपनियों के बढ़ते दखल के खिलाफ कड़ा रोष प्रकट किया।

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Kantap News डेस्क
11 अग 2026, 14:48
धर्मशाला में किसानों का आक्रोश: कॉरपोरेट भारत छोड़ो के नारों से गूंजा मैदान, नीतियों के खिलाफ फूटा गुस्सा
हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत पर्यटन शहर धर्मशाला में उस वक्त सियासी सरगर्मी और बढ़ गई जब राज्य भर से जुटे हजारों किसानों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 'कॉरपोरेट भारत छोड़ो' के तख्तियां हाथ में लेकर सरकार विरोधी नारे लगाए और कृषि क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। किसान नेताओं का कहना है कि आज अन्नदाता अपनी ही जमीन पर हाशिए पर धकेला जा रहा है और कॉरपोरेट घराने उनकी मेहनत का अनुचित लाभ उठा रहे हैं। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने मांग की कि किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कानूनी गारंटी के रूप में मिलना चाहिए।

कृषि संकट और स्थानीय मुद्दे

इस विशाल प्रदर्शन के दौरान पहाड़ी राज्यों में किसानों के सामने आ रही विशेष चुनौतियों जैसे जंगली जानवरों द्वारा फसल नुकसान और बागवानी उत्पादों के उचित दाम न मिलने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन उनकी समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है, जिसके कारण उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ रही है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक आक्रामक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

प्रशासनिक मुस्तैदी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन

किसानों के इस आक्रोश को देखते हुए धर्मशाला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। प्रदर्शन स्थल और मुख्य मार्गों पर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे ताकि कानून व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में बनी रहे। हालांकि किसानों का यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन उनके तीखे तेवरों ने सत्ता के गलियारों में हलचल जरूर पैदा कर दी है। स्थानीय प्रशासन ने किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है ताकि उनकी समस्याओं को सुनकर सरकार तक उचित माध्यम से पहुंचाया जा सके।
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