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एआई तकनीक का दुरुपयोग: भारत-इजरायल डिफेंस डील की खबर को MEA ने बताया पूरी तरह फर्जी और भ्रामक

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के बढ़ते खतरे का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया है, जहाँ भारत और इजरायल के बीच एक बड़े रक्षा सौदे को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरों को विदेश मंत्रालय ने सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह अफवाह करार दिया है।

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Kantap News डेस्क
11 अग 2026, 00:00
एआई तकनीक का दुरुपयोग: भारत-इजरायल डिफेंस डील की खबर को MEA ने बताया पूरी तरह फर्जी और भ्रामक

हाल के दिनों में इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ऐसी रिपोर्ट्स तेजी से फैली थीं, जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारत और इजरायल के बीच किसी नए और बड़े डिफेंस पैक्ट पर हस्ताक्षर हुए हैं। इन खबरों के तूल पकड़ने के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि ये सभी दावे पूरी तरह निराधार, काल्पनिक और मनगढ़ंत हैं। मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने बताया कि इस तरह की भ्रामक सामग्री आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और गलत नीयत वाले तत्वों द्वारा जानबूझकर फैलाई जा रही है ताकि जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा की जा सके और गलत सूचनाओं को बढ़ावा दिया जा सके।

तकनीक का खतरनाक होता रूप तकनीक के विकास के साथ-साथ इसके दुरुपयोग के मामले भी चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं। विशेषकर एआई जनित फर्जी दस्तावेज, वीडियो और ऑडियो क्लिप्स अब राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति के लिए भी एक चुनौती बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की फर्जी डिफेंस डील्स की खबरें न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलतफहमियां पैदा करती हैं, बल्कि देश की साख को भी प्रभावित करने की साजिश का हिस्सा हो सकती हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत की रक्षा नीतियां और आधिकारिक समझौते हमेशा पारदर्शी तरीके से संबंधित मंत्रालयों के माध्यम से सार्वजनिक किए जाते हैं।

जनता और मीडिया के लिए चेतावनी इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों और साइबर सेल ने सोशल मीडिया पर इस तरह की संवेदनशील और बिना पुष्टि वाली खबरों को साझा करने वालों के खिलाफ कड़ी निगरानी रखनी शुरू कर दी है। सरकार ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी सनसनीखेज दावे पर आँख मूंदकर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिलने वाली जानकारियों पर ही यकीन रखें।

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