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मानसून की विसंगति: देश भर में औसत से 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज, लेकिन जिन इलाकों में बादल बरसे वहां आई भारी तबाही
इस साल मानसून का दौर काफी अनोखा और चुनौतीपूर्ण रहा है। जून से लेकर अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल मिलाकर सामान्य से 14 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गई है, लेकिन जिन क्षेत्रों में बारिश हुई है वहां तबाही का मंजर देखने को मिला है।
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Ankit Yadav
01 सित 2026, 16:59
भारतीय मौसम विज्ञान और मानसून के बदलते मिजाज ने इस साल एक नई बहस छेड़ दी है। देश के एक बड़े हिस्से में जहां सूखे जैसे हालात या फिर सामान्य से कम बादलों के बरसने की शिकायत रही है, वहीं कुछ चुनिंदा इलाकों में भारी मानसूनी प्रलय देखने को मिली है। मौसम विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक जून से अगस्त तक के तीन महीनों के दौरान पूरे भारत में कुल वर्षा का औसत सामान्य से लगभग 14 प्रतिशत कम रहा है। इसके बावजूद, जिन स्थानों पर मूसलाधार बारिश हुई, वहां जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया और बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरें सामने आईं।
अजीब मानसूनी पैटर्न और खतरे
देश के विभिन्न राज्यों में मानसून की सक्रियता काफी असमान रही है। एक तरफ जहां कई जिले और राज्य पर्याप्त पानी के लिए तरसते नजर आए, वहीं दूसरी ओर कुछ विशेष क्षेत्रों में बादलों के फटने, लगातार मूसलाधार बारिश और बाढ़ जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचाई। इन इलाकों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया और स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। इस विसंगति ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और मौसम के बदलते चक्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे प्रशासनिक एजेंसियों और आपदा प्रबंधन दलों को भी लगातार हाई अलर्ट पर रहना पड़ रहा है।
agricultural और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका मिला-जुला प्रभाव देखने को मिल रहा है। कम बारिश वाले क्षेत्रों में फसलों की बुवाई और उनकी ग्रोथ पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसके लिए किसानों को अतिरिक्त सिंचाई साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके विपरीत, जिन इलाकों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ का प्रकोप रहा है, वहां खड़ी फसलें पूरी तरह से जलमग्न होकर बर्बाद हो चुकी हैं। किसानों को हुए इस आर्थिक नुकसान के बाद राज्य सरकारों और केंद्र प्रशासन द्वारा लगातार राहत और मुआवजे के पैकेजों पर विचार किया जा रहा है ताकि प्रभावित परिवारों को इस संकट से उबारा जा सके।
आगामी सितंबर महीने में मानसून के अंतिम चरण को लेकर मौसम विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं। जानकारों का मानना है कि मानसून की विदाई से पहले कुछ और राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जो कृषि सेक्टर के लिए थोड़ी राहत का सबब बन सकती है। हालांकि, प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है। आपदा प्रबंधन तंत्र को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशील और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखें ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत बचाव अभियान चलाया जा सके। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और अनावश्यक यात्राओं से बचें।