डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक अत्याधुनिक इंटरनेशनल फिश रिसर्च सेंटर स्थापित करने की दिशा में कार्य निरंतर जारी है। इसी क्रम में वर्तमान समय में इस महत्वपूर्ण संस्थान के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार की जा रही है। इस रिपोर्ट में केंद्र के निर्माण में आने वाले कुल खर्च और वहां स्थापित होने वाली विभिन्न वैज्ञानिक सुविधाओं का पूरा विवरण तैयार किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर इस परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है ताकि निर्माण कार्य शुरू होने में कोई बाधा न आए। इस कार्य के पूरा होने के बाद ही केंद्र के निर्माण की अंतिम रूपरेखा स्पष्ट हो पाएगी और आगे के प्रशासनिक आदेश जारी किए जाएंगे। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि समय सीमा के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।
मछली पालन को बढ़ावा देने की योजना
इस इंटरनेशनल फिश रिसर्च सेंटर के माध्यम से क्षेत्र में मत्स्य पालन के व्यवसाय को एक नई दिशा देने की योजना बनाई गई है। सेंटर के निर्माण से स्थानीय मछुआरों और किसानों को मछली की उन्नत नस्लों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी। वर्तमान में तैयार की जा रही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि अनुसंधान केंद्र में आधुनिक प्रयोगशालाओं का निर्माण हो सके। इन प्रयोगशालाओं के जरिए पानी की गुणवत्ता की जांच और मछलियों में होने वाली विभिन्न बीमारियों के रोकथाम पर शोध कार्य किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार इस संस्थान के शुरू हो जाने से गोरखपुर और आसपास के जिलों के लोगों को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। अधिकारी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि परियोजना का खाका ऐसा हो जिससे किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के आधुनिक तौर-तरीके आसानी से सिखाए जा सकें।
परियोजना का महत्व और पृष्ठभूमि
गोरखपुर जैसे बड़े जिले में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान केंद्र की स्थापना होना मत्स्य उद्योग के विकास के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पारंपरिक रूप से किए जाने वाले मछली पालन को आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़ने के लिए ऐसे संस्थानों की अत्यधिक आवश्यकता होती है। इस दिशा में तैयार हो रही डीपीआर के स्वीकृत होने के बाद केंद्र सरकार और राज्य सरकार के माध्यम से इसके लिए आवश्यक बजट का आवंटन किया जाएगा। आम जनता और स्थानीय किसानों के लिए यह केंद्र ज्ञान के एक बड़े स्रोत के रूप में काम करेगा जहाँ उन्हें मछली पालन की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा। आने वाले दिनों में जब यह परियोजना पूरी तरह धरातल पर उतरेगी तब उत्तर प्रदेश का यह क्षेत्र देश के प्रमुख मत्स्य अनुसंधान केंद्रों में शामिल हो जाएगा। फिलहाल सभी संबंधित विभाग डीपीआर के काम को समय पर पूरा करने के लिए आपसी समन्वय के साथ पूरी मुस्तैदी से जुटे हुए हैं।