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नवाचार छलांग: ग्लोबल इंडेक्स में भारत 38वें स्थान पर पहुंचा

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स की ताजा रैंकिंग में देश ने बड़ी तरक्की हासिल की है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्था की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्र ने इस सूची में लंबी छलांग लगाई है। हालांकि देश के भीतर इस प्रगति का दायरा कुछ ही महानगरों तक सीमित नजर आता है।

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Ankit Yadav
04 अक्ट 2026, 12:17
नवाचार छलांग: ग्लोबल इंडेक्स में भारत 38वें स्थान पर पहुंचा

ग्लोबल इंडेक्स में भारत का नया पायदान

संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत कार्य करने वाली वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन नामक संस्था द्वारा इस वर्ष का ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स जारी कर दिया गया है। इस ताजा सूची के अनुसार देश ने अपनी स्थिति में जबरदस्त सुधार करते हुए अड़तीसवां पायदान हासिल कर लिया है। यदि बीते दशक के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो वर्ष 2015 के दौरान इसी सूचकांक में राष्ट्र इकयासीवें स्थान पर मौजूद था। इस प्रकार पिछले दस वर्षों के लंबे अंतराल में राष्ट्र ने वैश्विक स्तर पर इनोवेशन के मोर्चे पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज कराई है। इस समूची रैंकिंग प्रक्रिया में दुनिया भर के कई देशों का मूल्यांकन किया गया जिसमें अपनी आय श्रेणी के हिसाब से राष्ट्र ने काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। वैश्विक स्तर पर शीर्ष दस देशों की सूची में स्विट्ज़रलैंड छासठ दशमलव सात अंकों के साथ पहले स्थान पर काबिज है जिसके बाद स्वीडन, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे प्रमुख देश आते हैं। ब्रिटेन छठे स्थान पर है जबकि नीदरलैंड, फिनलैंड तथा डेमार्च के बाद चीन दसवें स्थान पर है। चीन इस शीर्ष समूह में शामिल होने वाला इकलौता मध्यम आय वर्ग का देश है जबकि राष्ट्र भी इसी मध्यम आय श्रेणी के अंतर्गत अपने वर्ग में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। दक्षिण एशिया क्षेत्र की बात करें तो पड़ोसी देशों में बांग्लादेश एक सौ पांचवें स्थान पर खिसक गया है जबकि नेपाल एक सौ चौथे पायदान पर है। इसके अलावा भूटान चौहत्तरवें, श्रीलंका चौरावे तथा पाकिस्तान पंचावे स्थान पर दर्ज किए गए हैं।

देश के भीतर चार प्रमुख शहरों का दबदबा

वैश्विक मंच पर भले ही राष्ट्र की स्थिति काफी मजबूत हुई है किंतु देश की आंतरिक सीमाओं के भीतर नवाचार की यह चमक हर जगह एक जैसी दिखाई नहीं देती है। ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के शीर्ष सौ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इनोवेशन क्लस्टर्स यानी प्रौद्योगिकी केंद्रों में देश के केवल चार मुख्य शहर ही अपनी जगह बनाने में कामयाब हो पाए हैं। इन चारों प्रमुख महानगरों में दक्षिणी राज्य का महानगर बेंगलुरु पच्चीसवें स्थान पर है जबकि देश की राजधानी दिल्ली सत्ताईसवें पायदान पर टिकी हुई है। इसके अलावा वित्तीय नगरी मुंबई तितालीसवें स्थान पर मौजूद है और चेन्नई पांच पायदान की छलांग लगाते हुए उनहत्तरवें स्थान पर पहुंच गया है। इन चारों महानगरों ने मिलकर हालिया वर्ष में दस हजार तीन सौ से अधिक अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए आवेदन प्रस्तुत किए हैं। यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि पेटेंट सरकार द्वारा किसी आविष्कारक को प्रदान किया जाने वाला वह कानूनी अधिकार है जिसके तहत कोई दूसरा व्यक्ति या संस्था बिना अनुमति के उस नई वस्तु का निर्माण, बिक्री या उपयोग नहीं कर सकती है। इन शहरों की बात करें तो बेंगलुरु में सैमसंग और आईआईएससी आगे हैं जबकि दिल्ली में आईआईटी दिल्ली का प्रमुख योगदान है। मुंबई क्षेत्र में जियो प्लेटफॉर्म्स और आईआईटी बॉम्बे आगे चल रहे हैं तथा चेन्नई में टीवीएस मोटर और आईआईटी मद्रास बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। इन विशिष्ट केंद्रों में लगभग एक लाख से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए गए हैं और सात हजार छह सौ से ज्यादा स्टार्टअप निवेश सौदे भी संपन्न हुए हैं।

आंतरिक असमानता और भविष्य की चुनौतियाँ

शहरों के इन बड़े आंकड़ों के पीछे एक दूसरा पहलू भी छिपा हुआ है जिसे समझना बहुत जरूरी है। जब इन्हीं महानगरों का आकलन स्थानीय आबादी के अनुपात में किया जाता है तो तस्वीर काफी अलग नजर आती है। जनसंख्या के हिसाब से मूल्यांकन करने पर बेंगलुरु पचासीवें, दिल्ली छियानवेवें, चेन्नई सत्तावनवें और मुंबई अठानवेवें नंबर पर खड़ा मिलता है। महानगर बड़े हैं इसलिए उनके कुल आंकड़े बड़े दिखाई देते हैं परंतु वास्तविक आबादी के मुकाबले वहाँ होने वाला इनोवेशन उस अनुपात में कम आंका गया है। विभिन्न क्षेत्रों की बात करें तो आईटी और डिजिटल सेवाओं के निर्यात के मामले में देश पूरी दुनिया में पहले स्थान पर शुमार है। स्टार्टअप के क्षेत्र में होने वाले बड़े निवेश सौदों के लिहाज से भी राष्ट्र चौथे स्थान पर बना हुआ है। इसके विपरीत यदि शोध कार्यों से जुड़े लोगों की कुल संख्या और रिसर्च पेपर के प्रकाशन को देखा जाए तो देश मध्यम आय वाले देशों के औसत से भी पीछे चल रहा है। इस संबंध में रिपोर्ट की ओर से यह अहम सुझाव दिया गया है कि भविष्य में अनुसंधान और तकनीक के काम को केवल सूचना प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप तक सीमित न रखकर अन्य विभिन्न क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से फैलाना होगा ताकि देश के भीतर संतुलन स्थापित किया जा सके।

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