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सीमा पर संकट: धारचूला में भारत-चीन मार्ग का कुला गाड़ पुल उफनते नाले में बहा

उत्तराखंड के धारचूला क्षेत्र में भारत-चीन सीमा को आपस में जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कुला गाड़ ब्रिज तेज उफनते नाले की चपेट में आकर बह गया है, जिसके चलते इस सामरिक मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह से ठप पड़ गई है।

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Ankit Yadav
13 सित 2026, 13:15
सीमा पर संकट: धारचूला में भारत-चीन मार्ग का कुला गाड़ पुल उफनते नाले में बहा
उत्तराखंड के सीमावर्ती पर्वतीय इलाकों में प्रकृति का कहर एक बार फिर देखने को मिला है। धारचूला उपखंड में भारत और चीन सीमा को जोड़ने वाला अति महत्वपूर्ण कुला गाड़ पुल भारी उफान पर चल रहे नाले की भेंट चढ़ गया। अचानक आए इस सैलाब और पानी के तीव्र दबाव के आगे लोहे और कंक्रीट का यह ढांचा टिक नहीं सका और देखते ही देखते धराशायी होकर बह गया। इस पुल के बह जाने के कारण इस संवेदनशील सीमा क्षेत्र की तरफ जाने वाले तमाम रास्तों पर वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो गई है, जिससे सुरक्षा बलों और स्थानीय नागरिकों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

सामरिक और रणनीतिक मार्ग पर ग्रहण

यह पुल भारत और चीन की सीमा के पास अवस्थित होने के कारण अत्यंत रणनीतिक महत्व रखता है। इस मार्ग का उपयोग न केवल स्थानीय निवासियों द्वारा आवागमन के लिए किया जाता है, बल्कि यह देश की सुरक्षा से जुड़े सामरिक परिवहन के लिए भी बहुत अहम है। कुला गाड़ नाले में आए इस भीषण उफान ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों की कमजोर बुनियादी संरचना और भौगोलिक चुनौतियों को उजागर कर दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश या ऊपरी इलाकों से आ रहे पानी के कारण पर्वतीय नाले और नदियां खतरनाक रूप ले चुकी हैं, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को घटना की सूचना मिलते ही हाई अलर्ट पर कर दिया गया है। हालांकि, उफनते नाले के तेज बहाव और लगातार खराब बने मौसम के कारण घटनास्थल पर राहत और बहाली का कार्य शुरू करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और नुकसान का आकलन करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में सोचा जा सके। सुरक्षा एजेंसियों और जिला प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल यह सुनिश्चित करने पर है कि इस मार्ग से जुड़े तमाम संवेदनशील बिंदुओं पर लोगों की आवाजाही को पूरी तरह प्रतिबंधित रखा जाए ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। जैसे ही मौसम साफ होगा और नाले का जलस्तर नीचे उतरेगा, वैसे ही युद्धस्तर पर बे-पटरी हुई व्यवस्था को सुधारने और वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी पुल तैयार करने का काम शुरू किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर से सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क और पुल के बुनियादी ढांचे को मौसम के अनुकूल और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता को रेखांकित कर दिया है।
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