त्योहारी सीजन में वेंडर्स की सुरक्षा सुनिश्चित
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने देश भर के स्ट्रीट वेंडर्स के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। आयोग ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि मौजूदा त्योहारी सीजन के दौरान किसी भी वेंडर को उनकी आजीविका से वंचित न किया जाए। मनमाने तरीके से सामान जब्त करने की घटनाएं, अनुचित जुर्माना लगाना और वेंडर्स के साथ होने वाले उत्पीड़न को आयोग ने गंभीरता से लिया है। इन शिकायतों के सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की गई है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी वेंडर को बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए उनके कार्यस्थल से न हटाया जाए। यह कदम उन हजारों छोटे दुकानदारों के लिए राहत लेकर आया है जो त्योहारों के समय अपनी आजीविका चलाने के लिए फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर निर्भर रहते हैं। आयोग के इस कड़े रुख से जमीनी स्तर पर वेंडर्स को राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रशासनिक अधिकारियों को जवाबदेही के कड़े निर्देश
एनएचआरसी ने राज्यों के मुख्य सचिवों को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें। आयोग ने निर्देश दिया है कि ये आदेश तुरंत जिलाधिकारियों, नगर निकायों और पुलिस महकमे के अधिकारियों तक पहुंचाए जाएं। यदि किसी क्षेत्र को सार्वजनिक सुरक्षा या अग्निशमन के नजरिए से खाली कराना अनिवार्य हो, तो प्रशासन को पहले वेंडर्स के लिए वैकल्पिक वेंडिंग जोन की व्यवस्था करनी होगी। बिना किसी वैकल्पिक स्थान के वेंडर्स को हटाना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अलावा, आयोग ने स्थानीय प्रशासन को कुम्हारों, हस्तशिल्पियों और पारंपरिक कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को प्राथमिकता देकर वोकल फॉर लोकल की भावना को धरातल पर उतारने को कहा गया है। मुख्य सचिवों को इन तमाम निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट तैयार करनी होगी और उसे 18 अक्टूबर 2026 तक आयोग के समक्ष अनिवार्य रूप से जमा कराना होगा। यह समयसीमा प्रशासनिक कामकाज में जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से निर्धारित की गई है।
आजीविका का अधिकार और भविष्य की कार्ययोजना
आयोग की यह पहल स्ट्रीट वेंडर्स के आजीविका के अधिकार को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। त्योहारों के समय अक्सर प्रशासन द्वारा अतिक्रमण विरोधी अभियानों के नाम पर वेंडर्स को हटाया जाता है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अब स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्थिति में वेंडर्स को उत्पीड़न का शिकार नहीं बनने दिया जाएगा। इन आदेशों का पालन न करने वाले अधिकारियों पर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में वेंडिंग जोन की नीति को अधिक मानवीय बनाने की दिशा में भी यह निर्देश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक व्यवसायों को संरक्षण देने का आह्वान यह दर्शाता है कि आयोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की सुरक्षा को कितनी प्राथमिकता दे रहा है। 18 अक्टूबर 2026 की समयसीमा बीतने के बाद आयोग इन रिपोर्टों की समीक्षा करेगा और यदि प्रशासन द्वारा ढिलाई बरती गई तो आगे भी कड़े कदम उठाने की संभावना बनी रहेगी। फिलहाल पूरे देश में इस निर्देश का असर वेंडिंग क्षेत्रों की व्यवस्था पर देखने को मिलेगा।