दिल्ली कॉन्क्लेव में तकनीकी भविष्य पर मंथन
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संपन्न हुए तीन दिवसीय कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के अंतिम सत्र में देश के तकनीकी भविष्य की रूपरेखा को स्पष्ट रूप से सामने रखा गया। इस बड़े आयोजन के दौरान देश की आर्थिक विकास दर को गति देने वाले विभिन्न पहलुओं और वैश्विक स्तर पर निवेश आकर्षित करने की क्षमताओं पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया। डिजिटल इंडिया और आर्थिक लोकतंत्रीकरण विभाग के प्रमुख मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस मंच से देशवासियों को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का परस्पर मेल देश के अत्यंत दूरदराज इलाकों को भी सीधे तौर पर शेष दुनिया के साथ सहजता से जोड़ रहा है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि मौजूदा सरकार आर्थिक अवसरों के वास्तविक लोकतंत्रीकरण की दिशा में अत्यंत ठोस कदम उठा रही है। इस प्रकार की पहलों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की आर्थिक प्रगति का वास्तविक लाभ समाज के हर वर्ग और हर स्तर तक पहुंचे। विकसित राष्ट्र के 2047 के बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गुणवत्ता, उच्च मानक और निरंतर नवाचार को सबसे मजबूत आधारशिला बताया गया है। इन सभी बिंदुओं पर विचार करते हुए सम्मेलन ने भविष्य के विकास का एक स्पष्ट रोडमैप दुनिया के सामने रखा है।
उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर जोर
उत्पादन के क्षेत्र में देश की नई पहचान गढ़ने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता और उत्कृष्टता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी Management नामक संस्था की सराहना करते हुए मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अब देश के भीतर उत्कृष्टता को बढ़ावा देने वाला एक मजबूत इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की पहचान केवल भारी-भरकम उत्पादन क्षमता के बल पर ही स्थापित नहीं होगी, बल्कि इसके साथ निर्मित उत्पादों की अटूट विश्वसनीयता भी अहम भूमिका निभाएगी। आधुनिक आपूर्ति शृंखला और विभिन्न उद्योगों के भीतर एक सुदृढ़ क्वालिटी कल्चर का होना आने वाले समय की सबसे बड़ी और अनिवार्य आवश्यकता है। भविष्य की इन तमाम चुनौतियों से निपटने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण को हर स्तर पर लागू किया जा रहा है। देश के तकनीकी और आर्थिक विकास में यह संस्कृति एक मुख्य आधारस्तंभ का कार्य करेगी। सरकार की इन नीतियों और प्राथमिकताओं से यह बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि गुणवत्ता के मोर्चे पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह दृष्टिकोण भारतीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे खड़ा करने में मददगार साबित होगा और इससे देश की साख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत होगी।
6G तकनीक और पेटेंट हिस्सेदारी का बड़ा लक्ष्य
दूरसंचार के क्षेत्र में देश की भूमिका को लेकर एक बहुत बड़ा बदलाव दर्ज किया जा रहा है। अब तक 2G से लेकर 5G पीढ़ियों तक भारत मुख्य रूप से वैश्विक मानकों को केवल अपनाने वाला देश बनकर रह गया था। लेकिन आने वाली 6G तकनीक के दौर में भारत पूरी तरह से मानक तय करने वाली अग्रणी स्थिति में आ रहा है। यह अभूतपूर्व बदलाव देश की बढ़ती हुई तकनीकी दक्षता और मजबूत अनुसंधान शक्ति का अकाट्य प्रमाण है। आगामी 6G तकनीक से जुड़ी कुल वैश्विक पेटेंट हिस्सेदारी में कम से कम 10 प्रतिशत का बड़ा हिस्सा हासिल करने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया गया है। भारत 6G एलायंस इस विशेष दिशा में पूरी गति से काम कर रहा है और इस क्रम में कई पेटेंट पहले ही दाखिल किए जा चुके हैं। इस बहुआयामी पहल के माध्यम से न केवल देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को वैश्विक नेतृत्व प्राप्त होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड इंडिया की प्रतिष्ठा भी नई ऊंचाइयों को छुएगी। तकनीक के इस नए युग में भारत की यह सक्रिय भागीदारी दुनिया भर के बाजारों में देश का दबदबा सुनिश्चित करेगी। भविष्य की इन योजनाओं के जमीन पर उतरने से भारत वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक सिरमौर के रूप में स्थापित हो जाएगा।