जंतर-मंतर पर तिरंगा यात्रा और गिरफ्तारी का मामला
शुक्रवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने तिरंगा यात्रा का आयोजन कर केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध किया। यह विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुआ जब कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने की कोशिश करने वाले युवाओं को पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया। पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज की अगुवाई में नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक बड़ा समूह मुख्यालय से निकलकर ली मेरेडियन तक मार्च करता रहा। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य अभिजीत दीपके जैसे युवाओं की गिरफ्तारी पर अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज कराना था। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को देश के युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास करार दिया है। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने हाथों में तिरंगा लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग दोहराई। पुलिस द्वारा लगाई गई पाबंदियों और धारा 163 को पार्टी नेताओं ने प्रशासन की विफलता और दमनकारी नीति बताया है।
नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया और सरकार पर हमला
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए इसे तानाशाही का दौर बताया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से सवाल किया कि क्या अपने ही राष्ट्र में झंडा फहराना गुनाह बन चुका है। केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि जो लोग तिरंगे और भारत माता की जय के उद्घोष से नफरत करते हैं, उनकी सोच संदिग्ध है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वोट चोरों को अब गद्दी छोड़ देनी चाहिए और यह सत्ता परिवर्तन की लड़ाई है। उन्होंने दावा किया कि पहले आशुतोष रांका और सौरभ दास को जेल भेजने के बाद अब अभिजीत दीपके को पकड़ना सरकार की घबराहट को दर्शाता है। सौरभ भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि संविधान ने प्रत्येक नागरिक को कहीं भी घूमने और अपनी बात कहने का पूर्ण अधिकार दिया है, जिसे पुलिस द्वारा नहीं रोका जाना चाहिए।
आंदोलन का विस्तार और लोकतंत्र बचाने की चुनौती
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने इस आंदोलन को देशव्यापी बताते हुए कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते। पिछले 15 दिनों से 2 अक्टूबर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए निरंतर जारी है। गोपाल राय के अनुसार, अलग-अलग संगठन इस लड़ाई में एकजुट हैं और पुलिस की सख्ती के बावजूद कार्यकर्ताओं का मनोबल कम नहीं हुआ है। सरकार की दमनकारी नीति के विरुद्ध यह विरोध संसद भवन और राष्ट्रपति भवन के आसपास भी आयोजित किया गया। संजय सिंह ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए इसे किसी पार्टी का जश्न न बताकर व्यवस्था में बदलाव का जरिया बताया। पार्टी का कहना है कि तिरंगे के सम्मान और युवाओं के अधिकारों के लिए वे अपनी जंग जारी रखेंगे, चाहे शासन प्रशासन की ओर से कितनी ही बाधाएं क्यों न खड़ी की जाएं।