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राजनीति

शिक्षा प्रणाली पर सवाल: राहुल गांधी ने देश की व्यवस्था को युवा पीढ़ी के लिए विफल बताया

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है और आरोप लगाया है कि यह पूरी प्रणाली युवा पीढ़ी की उम्मीदों पर खरी उतरने में नाकाम रही है।

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Ankit Yadav
12 सित 2026, 11:14
शिक्षा प्रणाली पर सवाल: राहुल गांधी ने देश की व्यवस्था को युवा पीढ़ी के लिए विफल बताया
देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में बड़ी बहस छिड़ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने देश के युवाओं के भविष्य और वर्तमान शैक्षणिक ढांचे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि हमारी शिक्षण व्यवस्था न केवल आधुनिक समय की चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ है, बल्कि यह देश के नौनिहालों और युवा वर्ग की संभावनाओं को भी कुंठित कर रही है। उनके इस बयान के बाद शैक्षणिक सुधारों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है और विभिन्न हलकों से इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में अकादमिक शिक्षा और रोजगार बाजार की वास्तविक आवश्यकताओं के बीच एक बहुत बड़ी खाई पैदा हो चुकी है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से निकलने वाले लाखों छात्र हर साल डिग्रियां तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन व्यावहारिक ज्ञान और कौशल की कमी के कारण उन्हें अपनी योग्यतानुरूप नौकरियां पाने में भारी संघर्ष करना पड़ता है। राहुल गांधी के इस ताज़ा बयान ने इसी गंभीर समस्या को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है। उनका तर्क है कि मौजूदा मॉडल केवल रटने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है, जो युवाओं में आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता विकसित करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।

लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों में प्रतिक्रियाएं

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित देश के कई अन्य प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में इस मुद्दे पर छात्रों और शिक्षकों के बीच व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। लखनऊ विश्वविद्यालय और आसपास के शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों का कहना है कि पाठ्यक्रम में समय के साथ बदलाव न होना एक बहुत बड़ी विफलता है। आज का युवा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार महसूस नहीं करता है, क्योंकि बुनियादी ढांचे और प्रायोगिक शिक्षा की भारी कमी बनी हुई है। उत्तर प्रदेश और देश के अन्य राज्यों के छात्र लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि शिक्षा प्रणाली को रोजगारोमुखी और कौशल आधारित बनाया जाए ताकि भविष्य सुरक्षित हो सके।

भविष्य की दिशा और सुधार की मांग

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब यह सवाल फिर से मजबूती से उठने लगा है कि क्या देश की शिक्षण नीतियों में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है। शिक्षाविदों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि जब तक पाठ्यक्रम को जमीनी हकीकत और तकनीक आधारित नहीं बनाया जाएगा, तब तक युवा पीढ़ी को इस संकट से उबारना कठिन होगा। विपक्षी दल लगातार सरकार पर शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त निवेश न करने और नीतियों को ठीक से लागू न कर पाने का आरोप लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर और अधिक तीखी बहस देखने को मिल सकती है, जिससे नीति निर्माताओं पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
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